कल्पना कीजिए एक ऐसी स्टोरी जिसमें आदित्य और सिया की रोमांटिक पल हैं| और थ्रिलर काले साम्राज्य की, जिसकी जड़ें पिछले साठ सालों से हमारे देश के सिस्टम, राजनीति और सुरक्षा एजेंसियों में दीमक की तरह फैल चुकी हैं। इस अदृश्य लेकिन खौफनाक नेटवर्क का नाम है—'प्रोजेक्ट जीरो'।
धड़कने दिल की
कल्पना कीजिए एक ऐसी स्टोरी जिसमें आदित्य और सिया की रोमांटिक पल हैं और थ्रिलर काले साम्राज्य की, जड़ें पिछले साठ सालों से हमारे देश के सिस्टम, राजनीति और सुरक्षाएजेंसियों में दीमक की तरह फैल चुकी हैं। इस अदृश्य लेकिन खौफनाक नेटवर्क का नाम है—'प्रोजेक्ट जीरो'। यह कोई आम क्रिमिनल गैंग नहीं है यह एक ऐसा जागतिक सिंडिकेट है जो सरकारों को कठपुतली की तरह नचाता है। इस सिंडिकेट का सबसे बड़ा खजाना, पूरे पचास बिलियन डॉलर्स का काला धन और विदेशी संधियों के गुप्त दस्तावेज, एक बेहद जटिल 'हिप्नोटिक कोड' में सुरक्षित हैं। और वह कोड किसी तिजोरी ...और पढ़े
धड़कने दिल की - 1
मुंबई शहर की सुबह की हवा में एक अजीब सी रवानी होती है. समंदर की नमी जब पुरानी इमारतों दरारों से टकराती है, तो वक्त जैसे कुछ पलों के लिए ठहर जाता है. सेंट जेवियर्स Collage का वो विशाल, गॉथिक शैली का मुख्य द्वार हर साल हजारों सपनों को अपने भीतर समेटता है. काले- भूरे विशाल पत्थरों की ऊंची दीवारें, खिडकियों पर लगी नक्काशीदार लोहे की जालियां, और बीचो- बीच फैला हुआ वो हरा- भरा लॉन, जिसके कोने में सदियों पुराना बरगद का पेड अपनी मजबूत शाखों के साथ सीना ताने खडा था. इस बरगद के चबूतरे को सब ...और पढ़े
धड़कने दिल की - 2
दोपहर ढल चुकी थी, लेकिन सेंट जेवियर्स कॉलेज के गलियारों में तनाव की एक खामोश परत तैर रही थी। बोर्ड के पास की भीड़ तो धीरे-धीरे छंट गई थी, पर सिया के चेहरे का रंग अब भी नहीं लौटा था। वह पत्थर की पुरानी सीढ़ियों पर अपने घुटनों में सिर छिपाए बैठी थी। उसकी दोस्त तन्वी उसके कंधे पर हाथ रखे बार-बार कुछ समझाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन सिया के कानों तक आवाजें नहीं, सिर्फ अपने दिल की घबराई हुई धड़कनें पहुंच रही थीं।थोड़ी ही दूरी पर, बरगद के पेड़ की आड़ में खड़ा आदित्य अपनी उंगलियों ...और पढ़े
धड़कने दिल की - 3
लाइब्रेरी के सबसे अंधेरे कोने में हवा जैसे बर्फ बन चुकी थी। आर्काइव सेक्शन की ऊंची, महोगनी की पुरानी के बीच सिर्फ दो इंसानों की तेज चलती सांसों की आवाज सुनाई दे रही थी।आदित्य की उंगलियां खुली हुई डायरी के पन्नों पर ही जम चुकी थीं। ताला टेबल पर एक तरफ खुला पड़ा था और नन्हीं पीतल की चाबी धूप की एक पतली सी लकीर में चमक रही थी।"तुम... तुम मेरी डायरी के साथ क्या कर रहे हो?!"सिया के लफ्ज लाइब्रेरी की खामोशी को चीरते हुए निकले। उसकी आवाज में सिर्फ गुस्सा नहीं था; उसमें एक ऐसा भयानक खौफ ...और पढ़े