पीपल का चबूतरा, हुक्के की गुड़गुड़ और वहम की रातउस रात मोनू सिर्फ अपनी माँ की आवाज़ सुनना चाहता था।उसे नहीं पता था कि उस एक आवाज़ की तलाश उसे ऐसी चीज़ के सामने खड़ा कर देगी, जो शायद बहुत पहले से उसी पर नज़र रखे हुए थी।चैत का महीना बीतने को था। शाम ढलते ही गाँव की पगडंडियों पर एक अजीब-सी सिहरन रेंगने लगती थी।गाँव के बीचों-बीच पुराने शिव मंदिर के बाहर पीपल का विशाल पेड़ था। उसके नीचे बने चबूतरे पर रोज़ की तरह अलाव जल रहा था।
अनुरागिनी का रहस्यमय वचन - 1
अनुरागिनी का रहस्यमय वचनअध्याय 1: पीपल का चबूतरा, हुक्के की गुड़गुड़ और वहम की रातउस रात मोनू सिर्फ अपनी की आवाज़ सुनना चाहता था।उसे नहीं पता था कि उस एक आवाज़ की तलाश उसे ऐसी चीज़ के सामने खड़ा कर देगी, जो शायद बहुत पहले से उसी पर नज़र रखे हुए थी।चैत का महीना बीतने को था। शाम ढलते ही गाँव की पगडंडियों पर एक अजीब-सी सिहरन रेंगने लगती थी।गाँव के बीचों-बीच पुराने शिव मंदिर के बाहर पीपल का विशाल पेड़ था। उसके नीचे बने चबूतरे पर रोज़ की तरह अलाव जल रहा था। बूढ़े-बुजुर्ग अपनी मैली धोतियों को ...और पढ़े
अनुरागिनी का रहस्यमय वचन - 2
अनुरागिनी का रहस्यमय वचनअध्याय 2: पलाश का पत्ता और चूल्हे की ठंडी राखसुबह जब खपरैल की दरारों से छनकर फर्श पर उतरी, तो मोनू की आँख खुली।उसका पूरा बदन ऐसे टूट रहा था, मानो रात भर किसी ने लाठियों से पीटा हो। सिर भारी था और हलक में काँटे चुभ रहे थे।उसने फटी रजाई हटाई और चारपाई से नीचे पाँव रखे। सबसे पहले उसकी नज़र फर्श पर गई।रात को चूल्हे की राख से उसने जो गोल घेरा बनाया था, वह सुबह की सर्द हवा से उड़कर आधा मिट चुका था। कमरे का कोना-कोना बिल्कुल शांत पड़ा था।बाहर नीम की ...और पढ़े
अनुरागिनी का रहस्यमय वचन - 3
अनुरागिनी का रहस्यमय वचनअध्याय 3: स्कूल का पहला नंबर और वो अदृश्य रजाईहथेली के छालों में जब कच्चा मवाद लगे, तो फावड़े की मूठ पकड़ना किसी अंगारे को छूने जैसा लगता है।सुबह के धुंधलके में मोनू ने अपने दोनों हाथ देखे। रात भर में छालों की चमड़ी कड़ी हो चुकी थी, पर दर्द हड्डियों तक टीस रहा था। उसने बाल्टी के ठंडे पानी में हाथ डुबोए, एक तीखी सिसकारी ली और अपनी फटी कमीज़ के कोने से उँगलियाँ पोंछ लीं।आज स्कूल के सालाना इम्तिहान का नतीजा आना था।कस्बे के सरकारी हाई स्कूल के टीन-शेड वाले बरामदे में खासी भीड़ ...और पढ़े
अनुरागिनी का रहस्यमय वचन - 4
अनुरागिनी का रहस्यमय वचनअध्याय 4: ठाकुर की लाठी और दो बीघे की मेड़गाँव में जब किसी अनाथ का सिर लगे, तो सबसे पहले उन लोगों की आँखें दुखने लगती हैं, जिनकी अपनी कोई औकात नहीं होती।मोनू अब पंद्रह साल का हो चुका था।उसके चेहरे पर थोड़ी-सी दाढ़ी के रोएँ फूटने लगे थे और आँखों में उस कड़वे अकेलेपन की चमक थी, जिसे सिर्फ़ वही बच्चे समझ सकते हैं जिन्होंने बचपन में ही चिताओं की राख देखी हो।तहसील में अव्वल आने के बाद स्कूल में उसकी इज़्ज़त बढ़ गई थी, लेकिन गाँव की पगडंडियों पर चलने वाले भेड़ियों के जबड़े ...और पढ़े