हर कहानी की एक शुरुआत होती है। लेकिन कुछ कहानियाँ ऐसी होती हैं, जिन्हें इंसान नहीं — किस्मत खुद लिखती है। कुछ रिश्ते यूँ ही नहीं बनते। कुछ मुलाकातें संयोग नहीं होतीं। और कुछ जुदाइयाँ… सिर्फ जुदाई नहीं — एक श्राप की छाया होती हैं। यह कहानी सिर्फ प्यार की नहीं है। न ही सिर्फ बदले की। न ही सिर्फ धोखे और नफरत की। यह कहानी है एक ऐसे श्राप की — जो सदियों से प्रेम पर ग्रहण बनकर छाया हुआ है। कहते हैं, जब भी कोई प्रेम अपनी पूर्णता के करीब पहुँचता है —
श्रापित नज़र - 1 - मंदिर की सीढ़ियां
हर कहानी की एक शुरुआत होती है।लेकिन कुछ कहानियाँ ऐसी होती हैं, जिन्हें इंसान नहीं — किस्मत खुद लिखती रिश्ते यूँ ही नहीं बनते।कुछ मुलाकातें संयोग नहीं होतीं।और कुछ जुदाइयाँ… सिर्फ जुदाई नहीं — एक श्राप की छाया होती हैं।यह कहानी सिर्फ प्यार की नहीं है।न ही सिर्फ बदले की।न ही सिर्फ धोखे और नफरत की।यह कहानी है एक ऐसे श्राप की —जो सदियों से प्रेम पर ग्रहण बनकर छाया हुआ है।कहते हैं, जब भी कोई प्रेम अपनी पूर्णता के करीब पहुँचता है —वक्त की कोई अदृश्य शक्ति उसे तोड देती है।क्या इस सदी में भी प्यार पर ग्रहण ...और पढ़े