मध्यमवर्गीय परिवार की 22 वर्षीय माया की हंसती-खेलती जिंदगी अचानक एक भयानक तूफान में घिर गई। उसके पिता की तबीयत अचानक बिगड़ी और अस्पताल के आईसीयू में उन्हें वेंटिलेटर पर डालना पड़ा। डॉक्टर का साफ़ और कड़ा निर्देश था—"अगले 48 घंटों के भीतर 50 लाख रुपये का इंतज़ाम करना होगा, वरना हम आपके पिता को बचा नहीं पाएंगे।"माया ने मदद के लिए रिश्तेदारों, दोस्तों और परिचितों के हर संभव दरवाज़े को खटखटाया। हर जगह से उसे सिर्फ़ दिलासा, बहाने और नाकामी ही मिली।

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वर्जिनिटी - भाग 1

मध्यमवर्गीय परिवार की 22 वर्षीय माया की हंसती-खेलती जिंदगी अचानक एक भयानक तूफान में घिर गई। उसके पिता की अचानक बिगड़ी और अस्पताल के आईसीयू में उन्हें वेंटिलेटर पर डालना पड़ा। डॉक्टर का साफ़ और कड़ा निर्देश था— अगले 48 घंटों के भीतर 50 लाख रुपये का इंतज़ाम करना होगा, वरना हम आपके पिता को बचा नहीं पाएंगे। माया ने मदद के लिए रिश्तेदारों, दोस्तों और परिचितों के हर संभव दरवाज़े को खटखटाया। हर जगह से उसे सिर्फ़ दिलासा, बहाने और नाकामी ही मिली। जब घड़ी की सुइयां टिक-टिक करके उसके पिता की ज़िंदगी ...और पढ़े

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वर्जिनिटी - भाग 2

कमरे के भारी दरवाज़े के ऑटोमैटिक लॉक होने की गूँज अभी माया के कानों में ठहरी भी नहीं थी आर्यन की भारी, डरावनी परछाईं उस पर पूरी तरह हावी होने लगी। कमरे में छाई गहरी खामोशी को केवल माया की तेज़ चलती साँसें, उसके दिल की धड़कनें और धीमी सिसकियाँ ही तोड़ पा रही थीं। पूरे कमरे की मद्धम रोशनी में माहौल और भी ज़्यादा तनावपूर्ण महसूस हो रहा था। आर्यन ने बिना कोई जल्दी दिखाए, अपनी महँगी ब्लेज़र उतारी और बेपरवाह अंदाज़ में पास रखे चमड़े के सोफ़े पर फेंक दी। उसके बाद उसने धीमे, सधे और भारी ...और पढ़े

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वर्जिनिटी - भाग 3

रात का सन्नाटा कमरे की चार दीवारों के भीतर और गहराता जा रहा था। मद्धम पीली रोशनी में आर्यन साया माया पर पूरी तरह छाया हुआ था। दीवार से सटी खड़ी माया की साँसें इतनी तेज़ चल रही थीं कि उसकी छाती ऊपर-नीचे हो रही थी। आर्यन की सख्त और गर्म उंगलियों की पकड़ उसकी कमर पर और गहरी हो गई। माया ने अपनी बंद आँखों को खोलने की हिम्मत की, तो सीधे आर्यन की उन कड़क और गहरी आँखों से टकराई, जिनमें एक अजीब सा जुनून और अधिकार का नशा तैर रहा था।"छोड़िए मुझे... आप ऐसा नहीं कर ...और पढ़े

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वर्जिनिटी - भाग 4

सुबह की हल्की सुनहरी धूप कमरे के भारी और कीमती रेशमी पर्दों की सिलवटों के बीच से छनकर विशाल बेड पर सीधी पड़ रही थी। कमरे के भीतर का माहौल अभी भी बेहद तनावपूर्ण, शांत और भारी लग रहा था। आर्यन की मज़ाबूत, सख्त और वजनी बांह माया की नाज़ुक कमर पर किसी लोहे की ज़ंजीर की तरह कसी हुई थी। माया ने अपनी साँसें रोककर, बिना कोई आहट किए, धीरे से आर्यन के भारी हाथ को अपनी कमर से हटाने की नाकाम कोशिश की। उसने अपनी उंगलियों से उसकी कलाई को थोड़ा ढीला करने का प्रयास किया, लेकिन ...और पढ़े

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