हरियाणा के एक छोटे से गांव में नयना देवी रहती थी। गांव वाले उसे नयना कहकर बुलाते थे। नयना बहुत सुंदर थी, लेकिन स्वभाव से अक्खड़ और साफ दिल की थी। उसकी शादी पास के ही गांव में सुरेश नाम के लड़के से तय हुई। सुरेश का स्वभाव बिल्कुल उल्टा था - मीठा बोलने वाला, सबको मान देने वाला। नयना का जन्म महीने की सात तारीख को हुआ था। बुजुर्ग कहते थे कि सात का अंक केतु का होता है। केतु वाले लोग जिद्दी, स्वाभिमानी और बहुत धार्मिक होते हैं। उनकी कही बात अक्सर सच हो जाती है। नयना भी वैसी ही थी। वो किसी का दबाव बर्दाश्त नहीं करती थी। जो सही लगता वो करती, चाहे दुनिया कुछ भी कहे।
ठुकराईन नयना देवी - 1
ठकुराइन नयना देवीहरियाणा के एक छोटे से गांव में नयना देवी रहती थी। गांव वाले उसे नयना कहकर बुलाते नयना बहुत सुंदर थी, लेकिन स्वभाव से अक्खड़ और साफ दिल की थी। उसकी शादी पास के ही गांव में सुरेश नाम के लड़के से तय हुई। सुरेश का स्वभाव बिल्कुल उल्टा था - मीठा बोलने वाला, सबको मान देने वाला।नयना का जन्म महीने की सात तारीख को हुआ था। बुजुर्ग कहते थे कि सात का अंक केतु का होता है। केतु वाले लोग जिद्दी, स्वाभिमानी और बहुत धार्मिक होते हैं। उनकी कही बात अक्सर सच हो जाती है। नयना ...और पढ़े
ठुकराईन नयना देवी - 2
ठकुराइन नयना देवी- Part 2पिछले अंक में आपने पढ़ा था कि नयना देवी स्वभाव से जिद्दी और साफ दिल महिला है। उसे अपनी जिंदगी अपनी शर्तों पर जीना पसंद है। ससुराल में उसकी नंद सरिता से उसकी पहले दिन ही ठन गई थी, लेकिन वक्त के साथ सब बदलता है। अब आगे पढ़े=नयना देवी के सेवा भाव ने सरिता का मन पिघला दिया। सरिता अब नयना की ढाल बन गई। हर काम में वो नयना के साथ खड़ी रहती। समय तेजी से बीतने लगा। अगले साल नयना देवी ने एक सुंदर सी कन्या को जन्म दिया। सरिता अपनी भतीजी ...और पढ़े