1999 था। गाँव वैशाली की मिट्टी में उस समय भी एक अजीब सी दहशत घुली हुई थी। लोग कहते थे कि यहाँ रात के 2:00 बजे के बाद कोई भी अपने घर से बाहर नहीं निकलता, क्योंकि उस वक्त गाँव की हवा अपना रंग बदल लेती है। वह हवा भारी हो जाती है, जैसे कोई मरा हुआ इंसान साँस ले रहा हो। पर सुनेखा को इन बातों पर कभी विश्वास नहीं था। वह बीस साल की थी, पर उसकी आँखों में चालीस बरस का दर्द बैठा हुआ था। उसकी माँ मर चुकी थी, उसके पिता ने दूसरी शादी कर ली थी, और उसकी सौतेली माँ उसे किसी नौकरानी से भी बदतर समझती थी। बस किशन ही था जो उससे सच्चा प्यार करता था, या कम से कम सुनेखा को ऐसा ही लगता था।
धोखा - 1
1999 था। गाँव वैशाली की मिट्टी में उस समय भी एक अजीब सी दहशत घुली हुई थी। लोग कहते कि यहाँ रात के 2:00 बजे के बाद कोई भी अपने घर से बाहर नहीं निकलता, क्योंकि उस वक्त गाँव की हवा अपना रंग बदल लेती है। वह हवा भारी हो जाती है, जैसे कोई मरा हुआ इंसान साँस ले रहा हो। पर सुनेखा को इन बातों पर कभी विश्वास नहीं था। वह बीस साल की थी, पर उसकी आँखों में चालीस बरस का दर्द बैठा हुआ था। उसकी माँ मर चुकी थी, उसके पिता ने दूसरी शादी कर ली ...और पढ़े