“मैंने कुछ नहीं किया… मुझे मत मारो… बहुत दर्द हो रहा है। मैंने कोई गलती नहीं की। सच में मम्मी… वो तो विक्की अंकल ने मेरे साथ गलत व्यवहार किया था। मैं सच कह रही हूँ… मैंने कुछ नहीं किया।” रुचि आँखों में आँसू लिए अपनी माँ से विनती कर रही थी। लेकिन उसकी माँ, सावित्री जी, बिना रुके उस पर डंडे बरसाए जा रही थीं। “चुप कर, कर्मजली! हमें बेवकूफ समझ रखा है क्या? हम अच्छी तरह जानते हैं तू कैसी है। खुद आदमी पर डोरे डालती है और अब बिचारी बनने का नाटक कर रही है, बेचारे मिस्टर विक्की जैसे शरीफ आदमी पर इल्ज़ाम लगा रही है! आज तो तुझे सबक सिखाकर ही रहूँगी।” सावित्री जी गुस्से में रुचि को मारती जा रही थीं।
बेहद दर्द - 1
“मैंने कुछ नहीं किया… मुझे मत मारो… बहुत दर्द हो रहा है।मैंने कोई गलती नहीं की। सच में मम्मी… तो विक्की अंकल ने मेरे साथ गलत व्यवहार किया था। मैं सच कह रही हूँ… मैंने कुछ नहीं किया।”रुचि आँखों में आँसू लिए अपनी माँ से विनती कर रही थी।लेकिन उसकी माँ, सावित्री जी, बिना रुके उस पर डंडे बरसाए जा रही थीं।“चुप कर, कर्मजली! हमें बेवकूफ समझ रखा है क्या?हम अच्छी तरह जानते हैं तू कैसी है। खुद आदमी पर डोरे डालती है और अब बिचारी बनने का नाटक कर रही है, बेचारे मिस्टर विक्की जैसे शरीफ आदमी पर ...और पढ़े