ये पुस्तक मैं,मेरे गुरुदेव प्रभु श्रीमत्परमहंस परिव्राजकाचार्य श्रोत्रिय ब्रह्मनिष्ठ जूनापीठाधीश्वर आचार्यमहामण्डलेश्वर अनन्तश्रीविभूषित स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज जी के आशीर्वाद एवं प्रभु श्रीं नारायण की कृपा से लिखने का प्रयास करूंगी । ये पुस्तक आध्यात्मिक दर्शन करवाने में हम सब की सहकारी रहेगी । जो प्रश्न सनातन धर्म पे उठाए जाते है इस पुस्तक में उन सभी प्रश्नों के उत्तर आप को मिलेंगे । हमारे धर्म ग्रंथों में जो कहानियां हमें सुनाई गई ... आप सब को क्या लगता है , क्या वे केवल कहानियां है ? तो ऐसा नहीं है परमसत्य तो कुछ और ही है ...
आध्यात्मिक दर्शन - प्रस्तावना
ये पुस्तक मैं,मेरे गुरुदेव प्रभु श्रीमत्परमहंस परिव्राजकाचार्य श्रोत्रिय ब्रह्मनिष्ठ जूनापीठाधीश्वर आचार्यमहामण्डलेश्वर अनन्तश्रीविभूषित स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज जी के एवं प्रभु श्रीं नारायण की कृपा से लिखने का प्रयास करूंगी ।ये पुस्तक आध्यात्मिक दर्शन करवाने में हम सब की सहकारी रहेगी । जो प्रश्न सनातन धर्म पे उठाए जाते है इस पुस्तक में उन सभी प्रश्नों के उत्तर आप को मिलेंगे । हमारे धर्म ग्रंथों में जो कहानियां हमें सुनाई गई ... आप सब को क्या लगता है , क्या वे केवल कहानियां है ? तो ऐसा नहीं है परमसत्य तो कुछ और ही है ...हमारे धर्म ग्रंथों में ...और पढ़े
आध्यात्मिक दर्शन - प्रश्न 1- सनातन धर्म क्या है ?
प्रश्न 1 :- सनातन का अर्थ क्या है?आज के समय में सनातन शब्द बहुत सुनने को मिलता कोई स्वयं को सनातनी कहता है, कोई सनातन धर्म की महानता का वर्णन करता है, तो कोई इसके अस्तित्व और प्राचीनता पर प्रश्न उठाता है। परन्तु विचार करने योग्य बात यह है कि क्या हम वास्तव में सनातन शब्द का अर्थ जानते हैं?यदि किसी व्यक्ति से पूछा जाए कि सनातन क्या है, तो अधिकांश लोग इसे एक धर्म कहेंगे ,कुछ इसे परंपरा मानेंगे कुछ संस्कृति ,कुछ जीवन जीने की एक श्रेष्ठ पद्धति बताएँगे। परन्तु सत्य यह है कि सनातन केवल एक धर्म, ...और पढ़े
आध्यात्मिक दर्शन - प्रश्न 2 - प्राण प्रतिष्ठा क्या है ?
पिछले अध्याय में हमने सनातन का अर्थ समझा था । उसमें हमने पढ़ा कि मूर्ति पूजा का आध्यात्मिक अर्थ है ? मूर्ति पूजा में हमने प्राण प्रतिष्ठा के विषय में पढ़ा।अब अगर प्राण प्रतिष्ठा के विषय में बात की जाए तो कुछ व्यक्ति इसका गलत अर्थ निकाल सकते हैं। कुछ यह सोच सकते हैं कि क्या किसी साधारण मनुष्य में इतनी क्षमता है कि वह ईश्वर को किसी पाषाण की मूर्ति में प्रकट कर दे। कुछ लोग इस विषय का मजाक भी बनाते हैं कि सनातन में पाषाण की मूर्ति को पूजा जाता है ... और यह मूर्ति में ...और पढ़े
आध्यात्मिक दर्शन - प्रश्न 3 - क्या ईश्वर कण कण में है ??
हरि ॐ पिछले अध्याय से हम यह समझ रहे है कि ईश्वर कण कण में है । अब यह विचार प्रकट होता है कि यदि ईश्वर कण कण में है अर्थात् हम सभी प्राणी, जीवो में भी परमात्मा का ही अंश है। और यदि ऐसा ही है तो यह प्रश्न उठ सकता है कि क्या दुराचारी, पापी, चोर, जैसे व्यक्ति में भी ईश्वर है ??ईश्वर तो कण कण में है अर्थात् पाप कर्म करने वाले व्यक्ति में भी ईश्वर है ??? और क्या यदि ऐसा है तब तो ईश्वर ही हमे प्रेरित कर रहे है अनुचित कर्म करने के ...और पढ़े