एक साल कैसे निकल गया हमे पता ही नहीं चला। शुरुआत एक दोस्ती से हुई थी... और अब वो दोस्ती एक इम्तिहान से गुजरने वाली थी। पहले साल तक हम घर से अप-डाउन करते रहे। पर दूसरे साल में प्रैक्टिकल्स, अर्ली मॉर्निंग लेक्चर्स और असाइनमेंट्स ने मजबूर कर दिया कि हम कॉलेज के पास कोई पीजी ढूँढें। गाँव के कोने में एक पुराना, दो कमरों का मकान मिला — जिसे अब पेइंग गेस्ट बना दिया गया था। पेड़ों की छाँव, उसकी पुरानी दीवारें, और सन्नाटा — वो मकान देखते ही मेरे दिल में अजीब सी घबराहट हुई।

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Divya Drishti: The unseen truth

पहला मोड़" एक साल कैसे निकल गया हमे पता ही नहीं चला। शुरुआत एक दोस्ती से हुई थी... और वो दोस्ती एक इम्तिहान से गुजरने वाली थी। पहले साल तक हम घर से अप-डाउन करते रहे। पर दूसरे साल में प्रैक्टिकल्स, अर्ली मॉर्निंग लेक्चर्स और असाइनमेंट्स ने मजबूर कर दिया कि हम कॉलेज के पास कोई पीजी ढूँढें। गाँव के कोने में एक पुराना, दो कमरों का मकान मिला — जिसे अब पेइंग गेस्ट बना दिया गया था। पेड़ों की छाँव, उसकी पुरानी दीवारें, और सन्नाटा — वो मकान देखते ही मेरे दिल में अजीब सी घबराहट हुई। लेकिन ...और पढ़े

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Divya Drishti: The unseen truth - 1

एपिसोड 1 : दोस्ती का बंधननागपुर, महाराष्ट्र का एक बड़ा और चहल-पहल भरा शहर है जहाँ सपने तो पलते पर सच्चाइया छुप जाती हैं। शहर की चमक में सपने तो चमकते हैं, पर उन सपनों के पीछे का अंधेरा कोई नहीं देख पाता।नागपुर से कुछ दूर एक छोटा सा गाँव है पातालखेड़ी। जहाँ एक सुना सुना सा कॉलेज है — गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी। शहर से लगभग 35 किलोमीटर दूर और इसलिए हॉस्टल और पीजी का सहारा सबको लेना पड़ता है।जून का महीना था। आसमान मे बादल मंडरा रहे थे, नए सेमेस्टर की ख़ुशबू हवा में घुली ...और पढ़े

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