बारिश की वो पहली मुलाक़ात

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जुलाई का महीना था। आसमान कई दिनों से बादलों को थामे बैठा था, जैसे किसी इकरार का इंतज़ार कर रहा हो। और फिर उस दिन… पहली बारिश शुरू हुई। कॉलेज की छुट्टी के बाद आईशा बस स्टॉप पर खड़ी बस का इंतजार कर रही थी और तभी बारिश शुरू हो गई। बारिश के कारण हवा में मिट्टी की भीगी खुशबू घुली हुई थी। उसने दुपट्टा जैसे ही सिर पर रखा ही था कि बारिश और तेज़ शुरू हो गई। लोग बारिश से छुपने के लिए इधर-उधर भागने लगे। और तभी उसके सिर पर किसी ने छाता ला कर उपर कर दिया। “आप भीग जाएँगी…” एक धीमी सी मगर जानि पहचानी आवाज़ आई।

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बारिश की वो पहली मुलाक़ात - पार्ट 1

जुलाई का महीना था। आसमान कई दिनों से बादलों को थामे बैठा था, जैसे किसी इकरार का इंतज़ार कर हो। और फिर उस दिन… पहली बारिश शुरू हुई।कॉलेज की छुट्टी के बाद आईशा बस स्टॉप पर खड़ी बस का इंतजार कर रही थी और तभी बारिश शुरू हो गई। बारिश के कारण हवा में मिट्टी की भीगी खुशबू घुली हुई थी। उसने दुपट्टा जैसे ही सिर पर रखा ही था कि बारिश और तेज़ शुरू हो गई। लोग बारिश से छुपने के लिए इधर-उधर भागने लगे। और तभी उसके सिर पर किसी ने छाता ला कर उपर कर दिया।“आप ...और पढ़े

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बारिश की वो पहली मुलाक़ात - पार्ट 2

बारिश और एक मुहब्बत की शुरुआत :पहली बारिश के उस दिन के बाद सेजैसे मौसम ही बदल गया था। तरफ फुल खिलने लगी थी और हवाएं गुन गुना रही थी। अब बारिश को देखने का नजरिया भी बदल गया था।अब हर सुबह आईशा कॉलेज थोड़ा जल्दी आने लगी थी… और आरिफ़ भी थोड़ा देर तक रुकने लगा। वे दोनों अब साथ ही बैठने लगे और उनमें से जो जल्दी आ जाता तो दूसरे के लिए अपने पास जगह खाली रखते थे।उनकी बातें अब “हेलो” से आगे बढ़कर “कैसे हो?” तक पहुँच चुकी थीं।और “कैसे हो?” से “तुम्हारे बिना दिन ...और पढ़े

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बारिश की वो पहली मुलाक़ात - पार्ट 3

(एक अनदेखा सच) ️शादी को छह महीने हो चुके थे।पहली बारिश की शाम थी।आईशा बालकनी में खड़ी भीगती सड़कों देख रही थी। उसके चेहरे पर मुस्कान थी… लेकिन आँखों में हल्की सी बेचैनी।पीछे से आरिफ़ ने आकर उसके कंधों पर हाथ रखा।“क्या सोच रही हो?” उसने आईशा से पुछा---“बस… ये कि हमारी हर कहानी की शुरुआत बारिश से ही क्यों होती है?” उसने धीमी आवाज़ में जवाब दिया ।आरिफ़ मुस्कुराया, “क्योंकि बारिश ने ही हमें मिलाया था…”लेकिन इस बार आईशा की मुस्कान बहुत ही फिकी लग रही थी।पिछले कुछ दिनों से आरिफ़ बदला बदला सा नजर आ रहा था। ...और पढ़े

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बारिश की वो पहली मुलाक़ात - पार्ट 4

(सबसे मुश्किल इम्तिहान) रिया के मिलने के बाद जैसे आईशा की दुनिया पूरी हो गई थी। उसके लौटने से में जैसे जान आ गई थी।अब बारिश सिर्फ़ मोहब्बत और मिलन की ही निशानी नहीं थी…बल्कि कुदरत के के करिश्मे की भी थी।शादी को एक साल पूरा होने वाला था।उसी दौरान एक और खुशखबरी सामनेआई —आईशा माँ बनने वाली थी। पुरे घर में रौनक और खुशी का माहौल छाया हुआ था।रिया तो जैसे हर पल उसके साथ रहने लगी ।आरिफ़ की आँखों में भी एक नई जिम्मेदारी की चमक आ चुकीथी।“देखा? मैंने कहा था ना… हमारी हर अच्छी खबर बारिश ...और पढ़े

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