पिता और अन्य कहानियाँ

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सेठ रत्नाकर अपने समय के धनाढ्य व्यक्तियों में से थे। अच्छा खासा नाम था उनका। सब कुछ घर मे था, नौकर चाकर घर जायदाद घोड़े गाड़ियों के अंबार! और प्रभु महादेव जी की अपार कृपा थी कि किसी भी चीज़ की कमी अपर्याप्तता उनके दरवाजे पर कभी अपनी अप्रिय नागवार दस्तक नहीं दे सकी थी। दूर दूर तक उनकी कीर्ति भूति का यश फैला हुआ था। अपनी जवानी के दिनों में तकरीबन सभी तरह के ऐब पाले होंगे उन्होंने, लेकिन अधेड़ उम्र के आगे की दहलीज पार करने के साथ ही सभी ऐबों को सदैव के लिए तिलांजलि दे दी थीं। निस्संदेह यही दर्शन है।

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पिता और अन्य कहानियाँ, भाग-1

# पिता #सेठ रत्नाकर अपने समय के धनाढ्य व्यक्तियों में से थे। अच्छा खासा नाम था उनका। सब कुछ मे था, नौकर चाकर घर जायदाद घोड़े गाड़ियों के अंबार! और प्रभु महादेव जी की अपार कृपा थी कि किसी भी चीज़ की कमी अपर्याप्तताउनके दरवाजे पर कभी अपनी अप्रियनागवारदस्तक नहीं दे सकी थी। दूर दूर तक उनकी कीर्ति भूति का यश फैला हुआ था। अपनी जवानी के दिनों में तकरीबन सभी तरह के ऐब पाले होंगे उन्होंने, लेकिन अधेड़ उम्र के आगे की दहलीज पार करने के साथ ही ...और पढ़े

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पिता और अन्य कहानियाँ, भाग-2

{ चिखुरी } - १-वह नन्हीं सी जान अपनी माँ के आंचल से इस भांति संलग्न रहा करती मानों सकल भुवन से भयाक्रांत रहती हो। गोल मटोल सी देह और चंचल मन! मैं भी उसे बहुधा ' चिखुरी' कहकर चिढ़ाती और वह भी अविलंब एक मुंहजोर तोते के जैसे उलटे उसी नाम से मुझे भी संबोधित कर अनायास ही अपनी ओर आकृष्ट करने की कोशिश करती। उसका तदनंतर मुक्त कंठ से हंसना मेरे मन के सभी प्रेमद्वार ...और पढ़े

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पिता और अन्य कहानियाँ, भाग-3

¶¶ उसकास्पर्श ¶¶ कहानी - १-माँ बहुत दिनों से रुग्ण चल रहीं थीं और बहुधा काम पर से छुट्टी मार लिया करतीं थीं। पर उनका उस प्रकार अनुपस्थित रहना बहुत देर तक चलना मुश्किल ही था। वैसे भी तो बहुत से घर छूट गए थे और अब एक आखिरी सेठ जी का घर ही बचा था। वो भी संभवतः छूट ही जाता, यदि सेठ जी के जैसा दयालु इंसान ...और पढ़े

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