सुबह 9:10 बजे, ममता देवी : “सोनाई… अरे सोनाई! देख तो लड़की के कारनामे, कब से आवाज़ लगा रही हूँ फिर भी बिस्तर छोड़ने का नाम नहीं ले रही। अरे उठ, उठ!” ममता देवी की आवाज़ से कमरे की शांत फिज़ा हल्का सा काँप उठी। खिड़की के पर्दों के बीच से आती सूरज की नरम रोशनी बिस्तर पर पड़ रही थी, लेकिन उससे भी उस नींद की रानी पर कोई असर नहीं हुआ। उन्होंने फिर कहा, “बाद में कॉलेज के लिए लेट हो गई ना, तब मुझे दोष मत देना!”
तेरी चाहत में - 1
सुबह 9:10 बजे,ममता देवी : “सोनाई… अरे सोनाई! देख तो लड़की के कारनामे, कब से आवाज़ लगा रही हूँ भी बिस्तर छोड़ने का नाम नहीं ले रही। अरे उठ, उठ!”ममता देवी की आवाज़ से कमरे की शांत फिज़ा हल्का सा काँप उठी। खिड़की के पर्दों के बीच से आती सूरज की नरम रोशनी बिस्तर पर पड़ रही थी, लेकिन उससे भी उस नींद की रानी पर कोई असर नहीं हुआ।उन्होंने फिर कहा,“बाद में कॉलेज के लिए लेट हो गई ना, तब मुझे दोष मत देना!”बिस्तर पर गोल होकर सोई लड़की ने चिड़चिड़े चेहरे के साथ आँखें खोलीं। बिखरे बाल ...और पढ़े
तेरी चाहत में - 2
छोटेपन से ही अयन कुछ अलग था। सोनाई किसके साथ घूम रही है, किससे ज़्यादा बातें कर रही है, उसके करीब आने की कोशिश कर रहा है—हर चीज़ पर अयन की अजीब सी नज़र रहती थी।ये बात धीरे-धीरे सोनाई को घुटन देने लगी थी।स्कूल में कोई लड़का तो दूर, कोई लड़की भी अगर सोनाई के ज़्यादा करीब आने की कोशिश करती, तो अयन किसी ना किसी तरह उसे दूर कर देता। वह कभी चिल्लाता नहीं था, कभी खुलकर झगड़ा भी नहीं करता था… लेकिन उसकी शांत, ठंडी और गंभीर आवाज़ ही लोगों को डराने के लिए काफी थी।धीरे-धीरे सोनाई ...और पढ़े