मुंबई की बारिश का कोई भरोसा नहीं होता। कभी यह सुकून देती है, तो कभी ज़िंदगी की रफ्तार थाम देती है। उस रात भी कुछ ऐसा ही था। आसमान से पानी की चादर गिर रही थी और शहर की चकाचौंध लाइटें गीली सड़कों पर बिखरकर एक जादुई सा अहसास पैदा कर रही थीं। कबीर अपने ऑफिस के बाहर खड़ा घड़ी देख रहा था। रात के 11 बज चुके थे। उसकी आँखों में थकान थी और हाथ में एक भारी लैपटॉप बैग। वह स्वभाव से बहुत ही व्यवस्थित इंसान था। उसकी दुनिया एक्सेल शीट्स, डेडलाइन्स और 'टू-डू' लिस्ट के इर्द-गिर्द घूमती थी। उसके लिए ज़िंदगी का मतलब था—वक्त पर काम खत्म करना और वक्त पर घर पहुँचना। लेकिन उस रात कुदरत के पास उसके लिए कुछ और ही प्लान था।
बारिश के बीच एक अजनबी - 1
भाग 1: भीगी सड़क और एक अधूरी शुरुआतमुंबई की बारिश का कोई भरोसा नहीं होता। कभी यह सुकून देती तो कभी ज़िंदगी की रफ्तार थाम देती है। उस रात भी कुछ ऐसा ही था। आसमान से पानी की चादर गिर रही थी और शहर की चकाचौंध लाइटें गीली सड़कों पर बिखरकर एक जादुई सा अहसास पैदा कर रही थीं।कबीर अपने ऑफिस के बाहर खड़ा घड़ी देख रहा था। रात के 11 बज चुके थे। उसकी आँखों में थकान थी और हाथ में एक भारी लैपटॉप बैग। वह स्वभाव से बहुत ही व्यवस्थित इंसान था। उसकी दुनिया एक्सेल शीट्स, डेडलाइन्स ...और पढ़े
बारिश के बीच एक अजनबी - 2
भाग 2: खोई हुई चाबी और अनकहे सवालअगली सुबह जब कबीर की नींद खुली, तो बाहर बारिश थम चुकी लेकिन आसमान में अब भी काले बादलों का डेरा था। उसकी मेज पर रखा वह नीले पक्षी वाला चाबी का गुच्छा सुबह की हल्की रोशनी में चमक रहा था। कबीर ने उसे हाथ में लिया। वह पक्षी लकड़ी का बना था और उसके ऊपर 'Z' उकेरा गया था। ज़ोया। वह अजनबी लड़की जिसने कल रात उसे सिर्फ लिफ्ट नहीं दी थी, बल्कि उसकी व्यवस्थित और नीरस ज़िंदगी में एक हलचल पैदा कर दी थी।कबीर का दिमाग अब भी अपनी ऑफिस ...और पढ़े
बारिश के बीच एक अजनबी - 3
भाग 3: बादलों की लुका-छिपी और खुलते राज़रविवार की सुबह कबीर की आँखें उम्मीद से पहले ही खुल गईं। सबसे पहले अपनी खिड़की का परदा हटाया। बाहर तेज़ धूप खिली हुई थी। आसमान एकदम साफ और नीला था, जैसे कोई कलाकार ताज़ा कैनवास बिछाकर चला गया हो। कबीर के चेहरे पर मायूसी छा गई। ज़ोया ने कहा था—"अगर बारिश हुई, तो मैं मिलूँगी।"उसने अपनी अलमारी से एक कैज़ुअल शर्ट निकाली, पर फिर रुक गया। "शायद वह नहीं आएगी," उसने खुद से कहा और वापस अपनी ऑफिस की फाइलों की ओर मुड़ गया। पर उसका मन बार-बार उस नीले पक्षी ...और पढ़े
बारिश के बीच एक अजनबी - 4
भाग 4: बारिश की गूँज और एक नया आगाज़तीन महीने बीत चुके थे। मुंबई की गर्मी अब अपनी चरम पर थी, और कबीर वापस अपने उसी नीरस ऑफिस रूटीन में लौट आया था। वह विदेश से लौट तो आया था, लेकिन उसके अंदर का कुछ हिस्सा अब भी उस बरसात वाली रात में कहीं अटका हुआ था। उसने ज़ोया को कई बार फोन करने की कोशिश की, पर उसका नंबर बंद आ रहा था। वह उस पुराने कैफे और स्कूल भी गया, पर ज़ोया वहाँ नहीं मिली। उसे लगा कि शायद ज़ोया ने उस मदद को अपनी स्वाभिमान पर ...और पढ़े