मंडप सजा हुआ था। शहनाई की आवाज़ पूरे घर में गूंज रही थी। सबके चेहरों पर खुशी थी… सिवाय मेरे। मैं लाल जोड़े में सजी थी, लेकिन दिल अंदर से टूटा हुआ था। आज मेरी शादी थी… लेकिन उस लड़के से नहीं, जिससे मैंने बचपन से प्यार किया था। “दुल्हन जी, ज़रा मुस्कुरा दीजिए…” फोटोग्राफर ने कहा। मैंने हल्की-सी मुस्कान देने की कोशिश की, मगर आँसू आँखों से ज़िद कर रहे थे। सामने मंडप में बैठा था — अर्जुन सिंह राठौड़। शहर का सबसे रौबदार, घमंडी और अमीर बिज़नेसमैन। जिसके नाम से लोग डरते थे… और आज वो मेरा पति बनने वाला था। लेकिन यह शादी मेरी मर्ज़ी से नहीं हो रही थी।
Full Novel
नफ़रत वाला पति, मोहब्बत वाली ज़िंदगी - 1
मंडप सजा हुआ था। शहनाई की आवाज़ पूरे घर में गूंज रही थी। सबके चेहरों पर खुशी थी… सिवाय लाल जोड़े में सजी थी, लेकिन दिल अंदर से टूटा हुआ था। आज मेरी शादी थी… लेकिन उस लड़के से नहीं, जिससे मैंने बचपन से प्यार किया था।“दुल्हन जी, ज़रा मुस्कुरा दीजिए…” फोटोग्राफर ने कहा।मैंने हल्की-सी मुस्कान देने की कोशिश की, मगर आँसू आँखों से ज़िद कर रहे थे।सामने मंडप में बैठा था — अर्जुन सिंह राठौड़।शहर का सबसे रौबदार, घमंडी और अमीर बिज़नेसमैन।जिसके नाम से लोग डरते थे… और आज वो मेरा पति बनने वाला था।लेकि अस्पताल से घर लौटते वक्त अर्जुन ने मेरा हाथ पूरे रास्ते नहीं छोड़ा। पहले जो आदमी मुझसे दूरी बनाकर रखता था… आज वही मेरी उंगलियाँ ऐसे थामे हुए था जैसे डर हो कि मैं फिर कहीं खो न जाऊँ। गाड़ी की खिड़की से बाहर देखते हुए मैंने धी ...और पढ़े
नफ़रत वाला पति, मोहब्बत वाली ज़िंदगी - 2
गोलियों की आवाज़ अब और करीब आ चुकी थी।मैं डर से कांप रही थी… और अर्जुन के हाथ में थी।“मेरे पीछे रहो,” उसने सख्त आवाज़ में कहा।मैंने पहली बार उसकी आँखों में सिर्फ गुस्सा नहीं… बल्कि डर भी देखा।जैसे वह किसी अपने को खोना नहीं चाहता।“ये लोग कौन हैं?” मेरी आवाज़ काँप रही थी।“दुश्मन,” उसने छोटा सा जवाब दिया।घर के बाहर काले कपड़ों में कुछ लोग दीवार कूदकर अंदर घुस आए थे।नौकर-चाकर चीख रहे थे।अर्जुन ने मुझे सीढ़ियों के पीछे छुपा दिया।“जब तक मैं ना कहूँ, बाहर मत आना,” उसने आदेश दिया।लेकिन मैं वहीं खड़ी नहीं रह सकी।दिल कह ...और पढ़े
नफ़रत वाला पति, मोहब्बत वाली ज़िंदगी - 3
अस्पताल से घर लौटते वक्त अर्जुन ने मेरा हाथ पूरे रास्ते नहीं छोड़ा।पहले जो आदमी मुझसे दूरी बनाकर रखता वही मेरी उंगलियाँ ऐसे थामे हुए था जैसे डर हो कि मैं फिर कहीं खो न जाऊँ।गाड़ी की खिड़की से बाहर देखते हुए मैंने धीरे से पूछा—“आप इतने चुप क्यों हैं?”वह कुछ पल मुझे देखता रहा।“अगर उस रात तुम्हें कुछ हो जाता… तो मैं खुद को कभी माफ़ नहीं कर पाता,” उसकी आवाज़ भारी थी।मेरे दिल में हल्की-सी मुस्कान आ गई।“तो आपको फर्क पड़ता है?”उसने गाड़ी साइड में रोकी।पहली बार… उसने बिना झिझक मेरी आँखों में देखा।“फर्क?”“मीरा… तुम अब मेरी ...और पढ़े
नफ़रत वाला पति, मोहब्बत वाली ज़िंदगी - 4
अर्जुन की बाहों में खुद को सुरक्षित महसूस कर रही थी… लेकिन फोन पर लिखे दो शब्द मेरे दिमाग हथौड़े की तरह बज रहे थे —“Next Target.”“अब क्या होगा?” मेरी आवाज़ बहुत धीमी थी।अर्जुन की आँखें सख्त हो चुकी थीं।“अब खेल शुरू होगा,” उसने ठंडे स्वर में कहा।उसने तुरंत अपने किसी खास आदमी को कॉल किया—“सिक्योरिटी डबल कर दो। मीरा पर एक भी खरोंच नहीं आनी चाहिए।”मैं उसे देखती रह गई।जो आदमी मुझसे दूरी बनाकर रखता था… वही आज मेरी ढाल बन चुका था।लेकिन किस्मत को शायद यह मंजूर नहीं था।दो दिन सब शांत रहा।मगर तीसरी रात…मैं अपने कमरे ...और पढ़े
नफ़रत वाला पति, मोहब्बत वाली ज़िंदगी - 5
रात गहरी हो चुकी थी।मैं बालकनी में खड़ी नीचे देख रही थी।अर्जुन उस अजनबी महिला के सामने खड़ा था।उसके पर वही सख्ती वापस आ चुकी थी… जो मैं पहले दिन से देखती आई थी।महिला ने हल्की मुस्कान के साथ कहा—“काफी बदल गए हो अर्जुन।”अर्जुन ने ठंडे स्वर में जवाब दिया—“तुम यहाँ क्यों आई हो, सिया?”मेरे दिल की धड़कन तेज़ हो गई।सिया…उसका नाम सुनते ही अर्जुन का चेहरा क्यों बदल गया?सिया ने धीरे से कार का दरवाज़ा बंद किया और उसकी तरफ बढ़ी।“मुझसे मिलने की खुशी नहीं हुई?” उसने शरारती मुस्कान के साथ पूछा।अर्जुन की आँखों में ठंडापन था।“सीधे मुद्दे ...और पढ़े