सुबह का समय था।शहर अभी पूरी तरह जागा नहीं था, लेकिन सड़कों पर भागती जिंदगी की आहट सुनाई देने लगी थी। चाय की केतली से उठती भाप के साथ मिश्रा जी बरामदे में कुर्सी डालकर अख़बार पढ़ रहे थे।अख़बार के पहले पन्ने पर बड़ी हेडलाइन छपी थी —कॉलेजों में जाति आधारित भेदभाव खत्म करने के लिए नया नियम लागू।मिश्रा जी ने चाय की चुस्की ली और खबर को दोबारा पढ़ा। चेहरे पर हल्की चिंता की लकीर उभर आई।उन्होंने सोचा —“समाज इतनी जल्दी बदल जाएगा क्या? लोग मान लेंगे क्या?”अख़बार में नीचे लिखा था —कुछ जगहों पर विरोध प्रदर्शन हुए।

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पर्दे के पीछे - 1

सुबह का समय था।शहर अभी पूरी तरह जागा नहीं था, लेकिन सड़कों पर भागती जिंदगी की आहट सुनाई देने थी। चाय की केतली से उठती भाप के साथ मिश्रा जी बरामदे में कुर्सी डालकर अख़बार पढ़ रहे थे।अख़बार के पहले पन्ने पर बड़ी हेडलाइन छपी थी —कॉलेजों में जाति आधारित भेदभाव खत्म करने के लिए नया नियम लागू।मिश्रा जी ने चाय की चुस्की ली और खबर को दोबारा पढ़ा। चेहरे पर हल्की चिंता की लकीर उभर आई।उन्होंने सोचा —“समाज इतनी जल्दी बदल जाएगा क्या? लोग मान लेंगे क्या?”अख़बार में नीचे लिखा था —कुछ जगहों पर विरोध प्रदर्शन हुए। कुछ ...और पढ़े

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पर्दे के पीछे - 2

मिश्रा जी जैसे ही अंदर आए, उन्होंने देखा — मिश्राइन जी का चेहरा उतरा हुआ था।बच्चियाँ चुपचाप टीवी देख थीं।Mishra ji ने बैग रखा और बोले —“क्या हुआ? आज मुँह इतना फूला क्यों है?”Mishrain ji गुस्से में बोलीं —“क्या बताऊँ आपको… आज बाहर नाली साफ करने वाले आए थे। उनमें से एक बिना पूछे हाथ धोने घर के अंदर आ गया। सीधा नल पकड़ लिया।”उनकी आवाज़ में गुस्सा साफ था।“मैंने उसे खूब सुनाया। बोला — बिना पूछे घर में घुसने की हिम्मत कैसे हुई? जैसे-तैसे बाहर निकाला। फिर पूरा घर दोबारा साफ करना पड़ा।”Mishrain ji कुछ देर रुकीं, फिर ...और पढ़े

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