इस कहानी में हर मोड़ पर मौत खड़ी है। हर कदम के साथ खतरा बढ़ता जाता है और ज़िंदगी व मौत के बीच की रेखा मिटती चली जाती है। यह कहानी पूरी तरह से काल्पनिक है, जिसका किसी भी वास्तविक व्यक्ति, घटना या स्थान से कोई संबंध नहीं है।सुबह की हल्की धूप में शहर अभी पूरी तरह जागा भी नहीं था जब अमन, रोहन, साहिल, नेहा, पूजा और रिया एक लंबी ट्रिप के सपने लिए कार में बैठ चुके थे, शहर की भीड़, ज़िम्मेदारियों और रोज़मर्रा की थकान से दूर पहाड़ों की ठंडी हवा में कुछ पल ज़िंदा महसूस करने
भूखा जंगल - 1
इस कहानी में हर मोड़ पर मौत खड़ी है। हर कदम के साथ खतरा बढ़ता जाता है और ज़िंदगी मौत के बीच की रेखा मिटती चली जाती है। यह कहानी पूरी तरह से काल्पनिक है, जिसका किसी भी वास्तविक व्यक्ति, घटना या स्थान से कोई संबंध नहीं है।सुबह की हल्की धूप में शहर अभी पूरी तरह जागा भी नहीं था जब अमन, रोहन, साहिल, नेहा, पूजा और रिया एक लंबी ट्रिप के सपने लिए कार में बैठ चुके थे, शहर की भीड़, ज़िम्मेदारियों और रोज़मर्रा की थकान से दूर पहाड़ों की ठंडी हवा में कुछ पल ज़िंदा महसूस करने ...और पढ़े
भूखा जंगल - 2
हड्डियों से बने उस शहर के बीच खड़े अमन और रिया की साँसें बेकाबू थीं, दिल इतनी तेज़ धड़क था कि लगता था अभी सीना फाड़कर बाहर आ जाएगा, चारों तरफ़ इंसानी खोपड़ियों से बने खंभे थे जिन पर सूखे खून की परत जमी हुई थी, हवा में सड़ांध और जलते मांस की गंध मिली हुई थी, जैसे यहाँ मौत रोज़ सांस लेती हो, शहर की गलियाँ पत्थर की नहीं बल्कि हड्डियों की थीं जो हर कदम पर चरमराती थीं, जैसे किसी ज़िंदा चीज़ पर चल रहे हों, रिया ने अमन का हाथ कसकर पकड़ लिया, उसकी उँगलियाँ ठंडी ...और पढ़े