तेरी मेरी कहानी

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ब्लैक फॉर्मल ड्रेस में सजी हुई, आँखों पर ब्लॉक गॉगल्स लगाए, अर्शित रॉय—शहर का जाना माना, प्रसिद्ध और ताकतवर C.E.O—ऑफिस के दरवाज़े से बाहर निकला। उसके हर कदम में उच्चस्तरीय आत्मविश्वास झलक रहा था। सिर उठाकर चलते हुए वह ऐसा प्रतीत होता कि हर जगह उसका दबदबा है। ऑफिस के कर्मचारी हों या घर के नौकर, हर कोई उसे देखकर काँप उठता था। क्योंकि वह गुस्से वाला था। उसे काम में देर करने वाले या झूठ बोलने वाले लोग बिलकुल भी पसंद नहीं थे। कोई भी उसकी मर्जी या आदेश के खिलाफ नहीं जाता। करोड़ों की दौलत होने के कारण वह हर चीज़ खरीदने की क्षमता रखता था।

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तेरी मेरी कहानी - 1

ब्लैक फॉर्मल ड्रेस में सजी हुई, आँखों पर ब्लैक गॉगल्स लगाए, अर्शित रॉय—शहर का जाना माना, प्रसिद्ध और ताकतवर के दरवाज़े से बाहर निकला। उसके हर कदम में उच्चस्तरीय आत्मविश्वास झलक रहा था। सिर उठाकर चलते हुए वह ऐसा प्रतीत होता कि हर जगह उसका दबदबा है।ऑफिस के कर्मचारी हों या घर के नौकर, हर कोई उसे देखकर काँप उठता था। क्योंकि वह गुस्से वाला था। उसे काम में देर करने वाले या झूठ बोलने वाले लोग बिलकुल भी पसंद नहीं थे। कोई भी उसकी मर्जी या आदेश के खिलाफ नहीं जाता। करोड़ों की दौलत होने के कारण व ...और पढ़े

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तेरी मेरी कहानी - 2

और फिर एक दिन……सिया घर के कामों में व्यस्त थी तभी उसके फोन पर एक ईमेल आया—"Congratulations! You have shortlisted for the interview"ईमेल पढ़ते ही सिया की आँखों में आँसू आ गए। ये आँसू दर्द के नहीं, बल्कि खुशी, उम्मीद और उत्साह के थे। लेकिन खुशी के साथ डर भी था—"अगर घरवालों को पता चला और उन्होंने जाने नहीं दिया तो?"इंटरव्यू वाले दिन सिया ने साधा सा सूट पहनकर, कांपते कदमों से उस ऊँची चमकती बिल्डिंग के सामने खड़ी हुई, जो कि अर्शित रॉय की कंपनी थी।सिया डरी-सहमी बिल्डिंग के अंदर गई। अंदर का माहौल बहुत सख्त और प्रोफेशनल ...और पढ़े

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तेरी मेरी कहानी - 3

उस दिन के बाद से सिया कई दिनों तक ऑफिस नहीं आई। अर्शित रोज़ अपने केबिन में बैठकर सिया डेस्क की ओर देखता रहता और उसका इंतज़ार करता। फिर एक दिन उसने अपने पी.ए. को बुलाया और पूछा,“ये मिस शर्मा ऑफिस क्यों नहीं आ रही हैं?”पी.ए. ने जवाब दिया,“सर, उन्होंने आवेदन पत्र दिया है और कारण व्यक्तिगत बताया है।”यह सुनकर अर्शित ने सख़्त आवाज़ में कहा,“उनसे कहो कि जल्द से जल्द ऑफिस जॉइन करें। उनका काम पेंडिंग पड़ा है। अगर वह जल्दी नहीं आईं, तो हम उनकी जगह किसी और इंटर्न को काम पर रख लेंगे।पी.ए. के जाते ही ...और पढ़े

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तेरी मेरी कहानी - 4

अर्शित गुस्से और बेचैनी के बीच अपने घर पहुँचता है। उसके दिमाग़ में सिर्फ़ सिया का चेहरा घूम रहा की चुप्पी, उसकी मजबूरी और उसकी आँखों का दर्द। सब कुछ अर्शित के दिमाग़ में लगातार चल रहा था। वह बार-बार खुद से पूछ रहा था—“ये कैसी माँ है जो अपनी ही बेटी के बारे में ऐसी बातें कर रही थी और उस पर हाथ उठा रही थी?”यह सवाल उसके ज़ेहन में बार-बार गूंज रहा था।उस रात अर्शित सो नहीं पाया।सुबह ऑफिस पहुँचते ही उसने सिया को अपने केबिन में आने को कहा। सिया जैसे ही केबिन में गई , ...और पढ़े

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तेरी मेरी कहानी - 5

सिया ने घबराती हुई आवाज़ में जवाब दिया—“क… कुछ नहीं पापा। बस थक गई हूँ, आप परेशान मत होइए…”“बेटा, थकी नहीं बल्कि परेशान लग रही है। क्या बात है? अपने बाप को नहीं बताएगी?”— सिया के पापा ने चिंता भरी आवाज़ में कहा।यह सुनकर सिया खुद को रोक नहीं पाई और उसने अपने पापा को सब कुछ बता दिया। तब उसके पापा ने उसे समझाते हुए कहा—“बेटा, तेरी दोस्त बिल्कुल सही कह रही है। तू यहाँ बर्बाद हो जाएगी। जीवन भर तुझे यह सब सहना पड़ेगा और मैं कुछ नहीं कर पाऊँगा, क्योंकि जब तक तू यहाँ रहेगी, मेरा ...और पढ़े

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तेरी मेरी कहानी - 6

एक दिन देर शाम तक दोनों ऑफिस में ही थे।काम खत्म होने के बाद अर्शित ने हल्की मुस्कान के कहा—“मिस शर्मा, मुझे आप पर भरोसा था… और आज लग रहा है कि मेरा भरोसा बिल्कुल सही जगह लगाया गया था।”सिया ने पहली बार खुलकर मुस्कुराते हुए जवाब दिया—“सर, यह सब आपकी वजह से है। अगर आपने मुझ पर भरोसा न किया होता, तो शायद मैं आज भी डर में जी रही होती।”उस पल सिया को एहसास हुआ—जयपुर ने उसे सिर्फ़ नई नौकरी नहीं दी थी,बल्कि खुद पर भरोसा करना भी सिखाया था।और यही उसकी ज़िंदगी की असली शुरुआत थी…सिया ...और पढ़े

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