सुनहरे चंदन के पेड़ों की लंबी कतारों के बीच, एक छोटी-सी गुफा थी—शांत, ठंडी और सुगंध से भरी हुई। वही थी चंदनी का घर, चंदनवन की रक्षिणी। न जाने कितने वर्षों से वह अकेले ही इस विशाल चंदनवन की देखभाल करती आई थी। उसका काम था— पेड़ों को पानी देना, खाद डालना, घावों पर लेप लगाना, और सबसे बड़ी बात—उन्हें हर खतरे से बचाना।

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चंदनी - भाग 1

चंदनीलेखक राज फुलवरेसुनहरे चंदन के पेड़ों की लंबी कतारों के बीच, एक छोटी-सी गुफा थी—शांत, ठंडी और सुगंध से हुई। वही थी चंदनी का घर, चंदनवन की रक्षिणी।न जाने कितने वर्षों से वह अकेले ही इस विशाल चंदनवन की देखभाल करती आई थी। उसका काम था—पेड़ों को पानी देना,खाद डालना,घावों पर लेप लगाना,और सबसे बड़ी बात—उन्हें हर खतरे से बचाना।वह पेड़ों से बात करती थी, उनकी सांसों को समझती थी। और हर सुबह, जब सूरज सुनहरी रोशनी लेकर उगता, चंदनी एक-एक पेड़ के अंदर घुसकर उसकी खुशबू बढ़ाती। यह उसकी एक अनोखी शक्ति थी—जिससे चंदन के पेड़ों की सुगंध ...और पढ़े

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चंदनी - भाग 2

चंदनी भाग 2लेखक राज फुलवरेचंदनवन के ऊपर उस दिन अजीब-सी बेचैनी थी।हवा भारी थी, पत्तियाँ धीमे-धीमे काँप रहीं थीं, किसी बड़ी घटना से पहले प्रकृति स्वयं चेतावनी दे रही हो।चंदनी उस सूखे नीले पड़े चंदन के पेड़ को छूकर आज भी दुखी थी।पेड़ की मृत्यु ने उसे तोड़ दिया था—लेकिन आज वह पेड़ ही नहीं, शंपक भी उसके सामने खड़ा था।शंपक ने गंभीर आवाज़ में कहा—“चंदनी… तुमसे एक बात छुपी हुई है। अब मैं और छुपा नहीं सकता।”चंदनी ने सिर झुकाए हुए कहा—“जो भी कहना है, सच में कहना। अब मुझमें और झूठ सुनने की ताकत नहीं है।”शंपक ने ...और पढ़े

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