ह कहानी मैं उन सभी दिलों को समर्पित करती हूँ, जो टूटी हुई हालात में भी मोहब्बत पर यकीन रखते हैं। उन लड़कियों के लिए, जो अकेली होकर भी अपने परिवार के लिए लड़ती हैं, और उन लड़कों के लिए, जो अपनी दीवारों के पीछे एक नर्म दिल छुपाए रखते हैं।♥️✨ यह कहानी उन रिश्तों को सलाम है, जो एक काग़ज़ी समझौते से शुरू होकर, एक धड़कते हुए दिल की कहानी बन जाते हैं।
Full Novel
अनुबंध
---अनुबंध"कभी-कभी, प्यार को अपनाने का तरीका अनुबंध से ही शुरू होता है…' अनुबंध:प्यार या सौदा' – जल्द ही आपके कहानी मैं उन सभी दिलों को समर्पित करती हूँ,जो टूटी हुई हालात में भी मोहब्बत पर यकीन रखते हैं।उन लड़कियों के लिए, जो अकेली होकर भी अपने परिवार के लिए लड़ती हैं,और उन लड़कों के लिए, जो अपनी दीवारों के पीछे एक नर्म दिल छुपाए रखते हैं।️यह कहानी उन रिश्तों को सलाम है,जो एक काग़ज़ी समझौते से शुरू होकर,एक धड़कते हुए दिल की कहानी बन जाते हैं।️*********️ ट्रेलर सीन 1 :~बारिश के बाद की ठंडी हवा में वो उसके सामने ...और पढ़े
अनुबंध - 1
--- अनुबंध ️ "कभी-कभी, प्यार को अपनाने का तरीका अनुबंध से ही शुरू होता है… ‘अनुबंध: या सौदा’ – जल्द ही आपके सामने।" --- एपिसोड 1 — अनजान सौदा कॉरिडोर की लंबी सीढ़ियों पर अपनी फाइलों में गुम अनाया भागते-भागते आ रही थी। उसकी नज़र फाइलों में लिखी रिपोर्ट्स पर थी और कदमों की रफ्तार तेज़। तभी अचानक सामने से आती हुई एक कठोर दीवार-सी शख्सियत से उसकी जोरदार टक्कर हो गई। फाइलें चारों तरफ़ बिखर गईं। अनाया संभलते-संभलते खुद भी लड़खड़ा गई, लेकिन तभी एक मज़बूत हाथ ...और पढ़े
अनुबंध - 2
--- अनुबंध – एपिसोड 2 शर्तें और सीमाएं अनाया अपनी बहन को स्ट्रेचर पर जाते हुए बेचैन सी डॉक्टर के कमरे तक पहुँची। चेहरे पर आँसू, होंठों पर लगातार प्रार्थना और दिल में अजीब सी घबराहट। डॉक्टर ने गहरी साँस लेते हुए कहा – "ऑपरेशन इमर्जेंसी में करना पड़ेगा… लेकिन इसके लिए 20 लाख रुपये का खर्च आएगा।" अनाया के कानों में जैसे बम फट पड़ा। उसकी आँखें फैल गईं। आवाज़ काँप गई – "20… लाख? डॉक्टर… इतनी बड़ी रकम… अभी तो…!" डॉक्टर ने गंभीरता से कहा – "समय बहुत कम ...और पढ़े
अनुबंध - 4
--- अनुबंध – एपिसोड 4 नाश्ते के बाद विराट ने कहा, "अनाया, टाई सेट करो।" अनाया ने हल्की झिझक के साथ उसकी टाई ठीक की। विराट ने उसका ठोड़ी पकड़कर हल्की मुस्कान दी, "कल से ऑफिस आओ, और अपने काम में पूरी निपुणता दिखाओ।" अनाया ने सिर हिलाया, सभी की निगाहें उन पर थीं। "गुड गर्ल!," विराट ने कहा और ऑफिस की ओर निकल गए। विराट का ऑफिस हमेशा की तरह सख़्त और कड़ा था। कर्मचारियों के काम में कोई गलती नहीं बख़्शी जाती थी। उसने कर्मचारी एक-एक करके डांटा, लेकिन ...और पढ़े
अनुबंध - 3
--- अनुबंध – एपिसोड 3 शादी का दिन आखिरकार आ ही गया था। सुबह ही हवेली का माहौल रौनक से भरा हुआ था। फूलों की खुशबू, मंत्रों की गूंज और शादी की तैयारी में व्यस्त लोग — सब मिलकर इस पल को खास बना रहे थे। अनाया दुल्हन बनी थी, गहरे लाल रंग का लहंगा, ज़री और सुनहरी कढ़ाई से सजा हुआ। माथे पर माँगटीका, कानों में भारी झुमके, गले में हार और हाथों में मेहंदी से सजी चूड़ियाँ… उसकी खूबसूरती सबकी नज़रों को थाम ले रही थी। वो घबराहट और खुशी के ...और पढ़े
अनुबंध - 5
अनुबंध – एपिसोड 5 सुबह की हल्की धूप परदे के बीच से कमरे में आ रही थी।विराट की आदत हर दिन अलार्म से पहले ही उठ जाना—कड़क अनुशासन, बिल्कुल घड़ी की सुई जैसा।लेकिन आज... नींद उसकी आंखों में अटकी हुई थी।धीरे-धीरे उसने आंखें खोलीं और एक अजीब सन्नाटा महसूस किया।बिस्तर का दूसरा हिस्सा खाली था।सिल्क की चादर पर उसके बालों की खुशबू भी नहीं।उसका दिल अचानक धक् से हुआ।"अनाया?"उसने बिस्तर के पास देखा।ड्रॉअर खाली।अलमारी खुली।लेकिन कहीं उसका निशान नहीं।वो एक अजीब-सी बेचैनी में उठ खड़ा हुआ।कमरा चेक किया।डाइनिंग टेबल पर नहीं।गेस्ट रूम में नहीं।आँगन में नहीं।दिल में एक ...और पढ़े
अनुबंध - 6
अनुबंध – एपिसोड 6 ---दो दिन से… सिर्फ़ दो दिन हुए थे, लेकिन विराट सिंहानिया को लग रहा था सदियाँ बीत गई हों।वो, जिसकी एक नज़र पर लोग झुक जाया करते थे, आज अपनी ही पत्नी की एक नज़र का मोहताज बन गया था।ऑफिस में अनाया की मौजूदगी उसके लिए हवा जैसी थी—चुपचाप बहती हुई, लेकिन ज़िंदगी के लिए ज़रूरी।मगर पिछले दो दिनों से वो सिर्फ़ “जी सर”, “ठीक है सर” बोलकर निकल जाती।विराट अपने केबिन से शीशे के पार देखता—वो अपनी गुलाबी सलवार-कुर्ते में फाइलें सहेज रही थी, पेन अपने कान के पीछे अटका रखा था, होंठों ...और पढ़े
अनुबंध - 7
अनुबंध – एपिसोड 7 डाइनिंग टेबल पर खाने की थालियाँ सजी थीं।आरव बार-बार कोई न कोई बात छेड़ने की कर रहा था, लेकिन माहौल पर जैसे बर्फ़ की मोटी परत जमी हो।विराट सिंहानिया—जो हमेशा परफ़ेक्ट, कंट्रोल में और बेहद शांत लगता था—आज उसके चेहरे पर किसी पुराने तूफ़ान की लकीरें साफ़ दिख रही थीं।उसकी चुप्पी इतनी भारी थी कि चम्मच की खनक भी असहज कर रही थी।अनाया ने चोरी-चोरी उसकी ओर देखा।वो सीधे खाने की प्लेट पर नज़र गड़ाए था, लेकिन उसकी उँगलियाँ लगातार चम्मच से खेल रही थीं।"कुछ है… जो इसे भीतर से खा रहा है। पर ...और पढ़े
अनुबंध - 8
अनुबंध – एपिसोड 8 (पहली चिंगारी) सुबह का सूरज खिड़कियों से सुनहरी किरणें बिखेर रहा था।विराट कार ड्राइव कर था—चेहरे पर वही सख़्ती, पर आज कुछ हल्का-सा अलग। जैसे कोई बोझ ज़रा-सा कम हुआ हो।अनाया साइड सीट पर बैठी थी, खामोश, लेकिन उसकी नज़रें बार-बार साइड मिरर में जाकर उससे टकरा जातीं।वो सोच रही थी—"क्या ये वही आदमी है जो हर बात में ग़ुस्से से भरा रहता था? या फिर… मेरे साथ रहने के बाद बदल रहा है?"ऑफिस पहुँचे।कॉरिडोर से गुजरते हुए सब स्टाफ ने झुककर कहा—“गुड मॉर्निंग मैम।”उसने हल्के से स्माइल किया, लेकिन अंदर से अब भी ...और पढ़े
अनुबंध - 9
अनुबंध – एपिसोड 9 – जलन की ज्वालाऑफिस का कॉन्फ्रेंस रूम हमेशा की तरह ठंडे ए.सी. और हल्की हल्की की खुशबू से भरा हुआ था। दीवार पर लगी बड़ी स्क्रीन, टेबल पर सजी फाइलें, लैपटॉप्स और चारों तरफ बैठे कर्मचारी—सब कुछ एक कॉर्पोरेट डिसिप्लिन में ढला हुआ।लेकिन आज इस वातावरण में एक नई हलचल थी।राहुल मेहरा—कंपनी का नया जूनियर असिस्टेंट। अभी हाल ही में ऑफिस ज्वाइन किया था। चेहरा मासूम, आँखों में चमक, और लहजे में वो अपनापन जो जल्दी ही सबको अपना बना ले। उसे अभी तक ये नहीं पता था कि इस कंपनी की डायरेक्टर अनाया ...और पढ़े
अनुबंध - 10
अनुबंध – एपिसोड 10 इज़हार और इंकार कॉरिडोर की ठंडी दीवार से टिकाकर जब विराट ने अनाया को बाँहों में कैद किया था, उनकी साँसें जैसे वहीं थम सी गई थीं। पास खड़े होकर उसने पहली बार अपने दिल की बेचैनी को बाहर आने दिया था। उसकी गहरी, अंधेरी आँखों में जलन की आग थी, वो आग जो बरसों से बस दबी हुई थी, और अब उसके सामने इस लड़की ने उसे भड़का दिया था।वो और झुककर उसके होंठों तक आया। इरादा साफ़ था—उसे चूम लेने का। उसकी आँखों में भूख थी, पर वो भूख सिर्फ़ जिस्म ...और पढ़े
अनुबंध - 11
अनुबंध – एपिसोड 11 तन्हाई और तकरार रात बहुत लंबी थी।विराट अपने कमरे में अकेला था। कमरे की खिड़की से आती हल्की-हल्की रोशनी उसकी आँखों में पड़ रही थी। उसके सामने पड़ी व्हिस्की का ग्लास अनछुआ था।उसने कई बार दरवाज़े पर जाकर अनाया के कमरे का नॉब घुमाने की कोशिश की, लेकिन हर बार ठहर गया।उसकी साँसें भारी थीं। “मैं उसे खो नहीं सकता… लेकिन वो मुझसे इतनी दूर क्यों चली गई?”उसके गाल पर अब भी अनाया के थप्पड़ की जलन बची हुई थी—मानो हर लम्हा उसे याद दिला रही हो कि उसने उस ...और पढ़े
अनुबंध - 12
अनुबंध : एपिसोड 12 – टूटन और तलाशरात गहरी थी।बारिश की हल्की-हल्की बूँदें खिड़की से संगीत-सा बजा रही थीं।लेकिन विराट के अंदर कोई शोर था—वो शोर जो कई दिनों से बढ़ता जा रहा था।उसने आईने में खुद को देखा—एक टूटा हुआ आदमी।वो विराट सिंगानिया, जो हमेशा परफेक्ट, कंट्रोल में और अडिग दिखता था, आज अपने ही डर और अहंकार के बोझ तले बिखर चुका था।उसकी आँखों में लालिमा थी।वो फुसफुसाया—इनफ… अब और नहीं। अगर मैंने आज उसे खो दिया, तो ज़िंदगी भर खुद को माफ़ नहीं कर पाऊँगा।”---अनाया बालकनी में बैठी थीं। बारिश की बूँदें ...और पढ़े