हीरो...! - 4

** हीरो...!**  **भाग 4 : हीरो और सनशाइन**सुबह की पहली किरणों के साथ आर्या की आँखें खुल गईं। खिड़की से हल्की हवा आ रही थी। रात की बारिश की नमी अभी भी हवा में बाकी थी। उसने बिस्तर पर बैठकर एक पल आँखें बंद कीं। दिमाग में बार-बार वही आवाज़ घूम रही थी—“काश…” और फिर वह छोटी-सी मुस्कान जब इच्छा पूरी हो जाती थी।आर्या ने सिर हिलाया और उठ खड़ी हुई। आज की शर्ट गहरे नीले रंग की थी। जीन्स और सफेद स्नीकर्स। बैग कंधे पर डाला और नीचे उतर आई। माँ रसोई में थीं।“आज भी जल्दी?” माँ ने मुस्कुराते हुए