हीरो...!भाग 3 : छोटी-छोटी इच्छाएँअगली सुबह आर्या की आँखें平时 से थोड़ी जल्दी खुल गईं। खिड़की से हल्की धूप आ रही थी। बारिश रात भर चली थी, लेकिन अब आसमान साफ था। उसने बिस्तर पर बैठकर एक पल आँखें बंद कीं। दिमाग में बार-बार वही गोल-गोल आँखें और चॉकलेट केक वाली मुस्कान घूम रही थी।“आज भी केक माँग लेगी क्या?” उसने खुद से पूछा और हँस पड़ी। फिर उठकर तैयार हो गई—काली शर्ट, डार्क जीन्स, स्नीकर्स। बैग कंधे पर डाला और नीचे उतर आई।माँ ने नाश्ता देते हुए कहा—“आज चेहरा थोड़ा अलग लग रहा है।”आर्या ने पराठा तोड़ते हुए पूछा—“कैसे?”“जैसे