हीरो...! - 2

** हीरो...!**  **भाग 2 : पहली मुस्कान, पहली मदद**घंटी बजने के बाद कॉलेज की इमारत अचानक जीवंत हो उठी। गलियारों में छात्रों की भीड़ उमड़ पड़ी। कोई क्लास ढूँढ रहा था, कोई दोस्तों के साथ हँस रहा था, कोई मोबाइल पर वीडियो बना रहा था। हवा में नएपन की खुशबू घुली हुई थी—नए बैग, नई किताबें, नए चेहरे।आर्या अपनी क्लास में घुसी। उसने खिड़की के पास वाली सीट चुन ली। बाहर गार्डन दिख रहा था। वही गार्डन जहाँ थोड़ी देर पहले एक छोटी-सी लड़की तितली के पीछे भाग रही थी। आर्या ने बैग नीचे रखा और नोटबुक निकाली। उसके आसपास कुछ