शुभ सुनें

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ऋगुवेद सूक्ति-- (56) की व्याख्या " भद्रं कर्णेभि: श्रृणुयाम देव:"ऋगुवेद --1/89/8अर्थ--  हे ईश्वर ! हम अपने कानों से शुभ सुनें।यह ऋग्वेद का अत्यंत प्रसिद्ध शांति मंत्र है:मंत्र (ऋग्वेद-- 1.89.8):"भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवाःभद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः।स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवांसस्तनूभिःव्यशेम देवहितं यदायुः॥"अर्थ:हे देवताओं!हम अपने कानों से शुभ (कल्याणकारी) बातें सुनें,अपनी आँखों से शुभ दृश्य देखें,हमारे अंग (शरीर) स्वस्थ और स्थिर रहें, और हम अपनी पूरी आयु ईश्वर के हितकारी कर्मों में व्यतीत करें।भावार्थ--:यह मंत्र हमें जीवन का एक आदर्श मार्ग दिखाता है—सुनना भी शुभ हो (अच्छी बातें, सकारात्मक विचार)देखना भी शुभ हो (अच्छे कर्म, अच्छे दृश्य)शरीर स्वस्थ रहे और जीवन ईश्वर के अनुसार, धर्म और कल्याण में लगे।यह