भाग 8मौत या भ्रम“क्या तुम मेरे साथ खेलोगे…?”पालने में लेटे उस बच्चे की आवाज़ सुनते ही आरव का गला सूख गया।वो बच्चा बिल्कुल स्थिर लेटा था।लेकिन उसकी सफेद आँखें लगातार झपके बिना आरव को देख रही थीं।उसके होंठों पर फैली मुस्कान धीरे-धीरे और बड़ी होती जा रही थी।चरर… चरर…पालना अपने आप हिल रहा था।रोहन काँपती आवाज़ में बोला, “आरव… पीछे हट…”लेकिन आरव जैसे वहीं जम गया था।उसे ऐसा लग रहा था कि वो बच्चा सिर्फ उसे देख नहीं रहा…बल्कि उसके दिमाग के अंदर घुस रहा है।धीरे-धीरे।तभी बच्चे ने फिर फुसफुसाया—“माँ ने मुझे अकेला छोड़ दिया…”उसकी आवाज़ अचानक बहुत उदास हो