तेरहवा द्वार - 7

  • 96

भाग 713वाँ दरवाज़ा“माँ… क्या इस बार भी तुम मुझे बंद रखोगी…?”उस मासूम लेकिन डरावनी आवाज़ के साथ पूरा तहखाना काँप उठा।धड़ाम!!! धड़ाम!!!13वें दरवाज़े के पीछे कुछ लगातार टकरा रहा था।इतनी ताकत से… कि लोहे के मोटे ताले धीरे-धीरे टूटने लगे।ठन! ठन!रानी सुनयना का चेहरा डर से सफेद पड़ चुका था।उसकी सफेद आँखें अब पहली बार इंसानी लग रही थीं।जैसे वो सच में डरी हुई हो।वो अचानक आरव की तरफ मुड़ी और चीखी—“इसे मत खोलने देना!”तभी…दरवाज़े के नीचे से निकलता काला पानी तेजी से पूरे तहखाने में फैलने लगा।वो पानी सामान्य नहीं था।उसके अंदर कुछ हिल रहा था।छोटे-छोटे काले साए।जैसे दर्जनों