तेरहवा द्वार - 6

भाग 6आधी रात की औरत“माँ… मुझे बाहर आने दो…”तहखाने में गूँजी उस आवाज़ ने दोनों के शरीर में जैसे बर्फ जमा दी।आरव और रोहन बिल्कुल स्थिर खड़े थे।काले लोहे के उस विशाल दरवाज़े के पीछे… कुछ था।कुछ ऐसा… जो इंसान नहीं था।दरवाज़े के नीचे से निकलता काला पानी अब धीरे-धीरे उनकी तरफ बढ़ रहा था। उसके साथ इतनी भयानक बदबू फैल रही थी कि साँस लेना मुश्किल हो गया।धड़ाम!!!एक बार फिर अंदर से जोरदार चोट की आवाज़ आई।पूरा तहखाना काँप उठा।छत से मिट्टी गिरने लगी।रोहन डर के मारे चिल्ला पड़ा, “भागो यहाँ से!”लेकिन आरव की नजर उस दरवाज़े पर जमी