हवा अब पहले जैसी नहीं रही थी। उसमें ठंड के साथ एक गंध भी थी जली हुई चीज़ों की जैसे कहीं कुछ बहुत पहले जलाया गया हो पेड़ के पास खड़े चारों लोग अब समझ चुके थे कि ये मामला साधारण नहीं है।आरव ने धीरे से डिब्बे को वापस जमीन पर रखा लेकिन इस बार उसे ढका नहींआरव- ये किसी ने बाँधा है और बिना कारण कोई इतना मजबूत बंधन नहीं करता।कबीर की नजर अब पेड़ के तने पर थी। उसने उँगलियों से हल्का सा छुआ फिर तुरंत हाथ पीछे खींच लियाकबीर- यहाँ सिर्फ आत्मा नहीं है यहाँ मंत्रों के