सयानी की शादी जिस दिन तय हुई, उस दिन से ही हवाओं में एक अजीब सी खामोशी थी। जब उसे उस पुरानी हवेली में दुल्हन बनाकर लाया गया, तो उसे लगा था कि यह सिर्फ एक बड़े परिवार का हिस्सा बनने की शुरुआत है। लेकिन उस हवेली की देहरी पार करते ही, सयानी को एक सिहरन महसूस हुई। वह हवेली नहीं, बल्कि जैसे कोई सोती हुई बला थी, जो आधी रात के बाद अंगड़ाई लेती थी।यहाँ सयानी का पति, एक ऐसा इंसान था जिसे सयानी ने शादी के बाद से शायद ही कभी दिन के उजाले में देखा हो।