तेरहवा द्वार - 4

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भाग 4दीवारों का सच“उसने अपने बच्चे को अभी तक नहीं छोड़ा…”आरव की आँखें उस portrait पर जमी रह गईं।हवा अचानक और ठंडी हो गई थी। कॉरिडोर की सारी लाइटें धीमे-धीमे टिमटिमा रही थीं। ऐसा लग रहा था जैसे पूरा हवेली ज़िंदा हो… और उनकी हर हरकत देख रही हो।रोहन काँपती आवाज़ में बोला, “भाई… यहाँ से चलते हैं…”लेकिन आरव जैसे सुन ही नहीं रहा था।उसकी नजर उस औरत की गोद में बैठे बच्चे पर टिक गई थी।बच्चे का चेहरा पूरी तरह काला था।सिर्फ उसकी आँखें दिखाई दे रही थीं।सफेद।बिल्कुल उसी औरत जैसी।तभी…portrait की औरत की मुस्कान धीरे-धीरे बड़ी होने लगी।आरव