तेरहवा द्वार - 2

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भाग 2पहली आवाज़“तुम वापस क्यों आए…?”उस आवाज़ ने जैसे आरव के शरीर का खून जमा दिया।वो तुरंत पलटा।लेकिन पीछे कोई नहीं था।सिर्फ टूटी दीवारें… सीलन की बदबू… और अँधेरा।उसकी साँसें बेकाबू हो चुकी थीं। कैमरा उसके काँपते हाथों में लगातार हिल रहा था। हवेली के अंदर का माहौल इतना भारी था कि साँस लेना भी मुश्किल लग रहा था।“क… कौन है?”उसकी आवाज़ पूरे हॉल में गूँज गई।जवाब में सिर्फ हवा चली।ऊपर कहीं लकड़ी के दरवाज़े के धीरे-धीरे हिलने की आवाज़ आई।चररर…आरव ने खुद को संभालने की कोशिश की।“Calm down… ये सिर्फ हवा है…”लेकिन अंदर कहीं न कहीं उसे महसूस हो