शाम की हल्की सुनहरी रोशनी उस छोटी-सी बस्ती की गलियों में बिखरी हुई थी, जहाँ हर घर अपनी अलग कहानी कहता था—संघर्ष, उम्मीद और अधूरे सपनों की।उसी बस्ती के एक कोने में था काव्या का घर…अठारह साल की मृगा ,एक साधारण-सी लड़की, लेकिन हालात ने उसे वक्त से पहले ही समझदार बना दिया था। वह अपने घर की सबसे बड़ी बेटी थी, उसके पिता बाबूलाल अब इस दुनिया में नहीं थे—लंबी बीमारी ने उन्हें छीन लिया था। पीछे रह गई थीं उसकी माँ सरोज और दो छोटी बहनेंपायल (कक्षा 8) – समझदार और शांत स्वभाव कीचंचल (कक्षा 6) – थोड़ी