डॉमनिक की वापसी - 8

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कई दिन गहरे सन्नाटे में बीते थे। पाँच लाख का इन्तज़ाम नहीं होना था सो नहीं हुआ…, बाहर सब कुछ पहले सा ही था पर भीतर कहीं कुछ दरक गया था. शायद माँ के अलावा कोई उस दरकन की टोह भी नहीं ले सका था. माँ उस दिन कई सालों बाद सीढ़ियाँ चढ़ के उस कमरे में आई थीं जिसे वह नीचे से ही देखा करती थीं. बड़ी देर तक चुपचाप उसके सिरहाने बैठी रहीं फिर उठते हुए बोलीं, ‘बेटा इस लड़ाई में हर उस आदमी की जरूरत है जो पहाड़ों से प्रेम करता है’ उसके बाद वह धीरे-धीरे सीढ़ियाँ उतरती नीचे चली गईं.