नन्हकू

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अँधेरा बढ़ गया था और ताई दिन भर की भूखी प्यासी वहीँ पर बैठी थीं। तभी उन्हें लगा जैसे की गेट पर कोई है। कहीं वही तो नहीं। ताई ने लपक कर बिजली जलाई। उनका नन्हकू ही था। बूढ़े शारीर में जाने कहाँ की शक्ति आ गयी उन्होंने दौड़ कर गेट खोला। नन्हकू लंगड़ा रहा था। उस