[दृश्य 1] स्थान: घर का आंगन / हॉल समय: शाम का वक्त सूरज ढल रहा है और आसमान में हल्की लाली छाई हुई है। घर के अंदर हवा में एक सुकून और अपनापन घुला हुआ है। आंगन में पाँच साल का मासूम रेहान अपनी माँ के आँचल के पीछे छुपने की कोशिश कर रहा है। उसकी तोतली सी आवाज़ और पैरों की छोटी-छोटी आहट से पूरा घर चहक रहा है। पास ही हॉल में खड़ी रेहान की माँ [सिमरन - उम्र 30 वर्ष] चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान लिए चारों तरफ देख रही हैं और बाहें फैलाकर बोलती हैं—
मौत का डर - पार्ट 1 ( खूनी खेल )
[दृश्य 1]स्थान: घर का आंगन / हॉलसमय: शाम का वक्तसूरज ढल रहा है और आसमान में हल्की लाली छाई है। घर के अंदर हवा में एक सुकून और अपनापन घुला हुआ है।आंगन में पाँच साल का मासूम रेहान अपनी माँ के आँचल के पीछे छुपने की कोशिश कर रहा है।उसकी तोतली सी आवाज़ और पैरों की छोटी-छोटी आहट से पूरा घर चहक रहा है।पास ही हॉल में खड़ी रेहान की माँ [सिमरन - उम्र 30 वर्ष]चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान लिए चारों तरफ देख रही हैं और बाहें फैलाकर बोलती ...और पढ़े
मौत का डर - पार्ट 2 ( मीसा का साया )
[दृश्य 1]स्थान: रेहान का कमरासमय: रात के 11:10 बजेकमरे में गूँजती उस फोन की घंटी ने रेहान को अतीत भंवर से खींचकर बाहर ला पटका। उसके हाथ अभी भी काँप रहे थे। भारी कदमों से वो आगे बढ़ा और बेड पर लगातार बज रहे मोबाइल को उठाकर कान से लगा लिया।[रेहान - भारी और रुंधे गले से]: "हलो... कौन?"दूसरी तरफ से ममता और फिक्र से भरी जानी-पहचानी आवाज़ गूँजी—[मीसा]: "बेटा... मैं मीसा बोल रही हूँ।"[फ्लैशबैक - बीस साल पहले की वो रात]हॉल के फर्श पर खून फैलकर ठंडा पड़ रहा था। पाँच साल का रेहान... जिसके पूरे कपड़े खून ...और पढ़े
मौत का डर पार्ट 3 ( सुबह का इंतिहाम )
[दृश्य 1]स्थान: रेहान का कमरा और मुंबई की सड़केंसमय: सुबह के 7:00 बजेसुबह की हल्की धूप खिड़की से अंदर सीधे रेहान के चेहरे पर पड़ी। कमरे में उजाला फैल चुका था। बेड पर अपनी माँ-बाप की तस्वीर सीने से लगाए रेहान गहरी नींद में सोया था। रात की बेचैनी और तनाव उसके पूरे चेहरे पर साफ झलक रहा था।जैसे ही उसकी आँख खुली, उसने धीरे से अपनी पलकें झपकाईं और कसकर अपनी दोनों हथेलियों से अपना माथा भींच लिया।उसे तुरंत याद आया कि आज कॉलेज में रिजल्ट का दिन है और मीसा आंटी ने सुबह होने से पहले आने ...और पढ़े
मौत का डर पार्ट 4 ( कॉलेज )
[दृश्य 1]स्थान: मुंबई के कॉलेज का मेन गेटसमय: सुबह के ठीक 8:00 बज रहे हैं।सड़कों के ट्रैफिक और लंबी के बाद रेहान ने अपनी बाइक लाकर कॉलेज के गेट के ठीक बाहर खड़ा कर दिया। पीछे बैठा राहुल तेजी से बाइक से नीचे उतरा और अपना बैग कंधे पर समेटा।रेहान ने भी अपनी बाइक का स्टैंड लगाया और कंधे पर टंगा बैग संभालते हुए तेजी से बाइक से नीचे उतरा।लेकिन जैसे ही उन दोनों की नजर कॉलेज के मेन लोहे के गेट पर पड़ी, उनके पाँव जैसे जमीन पर ही जम गए—कॉलेज का भारी गेट धीरे-धीरे बंद होने लगा ...और पढ़े