शहर की तेज रफ्तार जिंदगी, चमचमाती कारें और ऊंची-ऊंची इमारतें—इन सबके बीच 'ओरियन कॉर्पोरेशन' की इस हफ्ते की शाम बेहद खास थी। यह कंपनी देश की सबसे बड़ी मीडिया और टेक फर्मों में से एक थी। इस भव्य पार्टी में देश के तमाम बड़े उद्योगपति, राजनेता और मशहूर हस्तियां मौजूद थीं।
The Secret Millionaire - 1
शहर की तेज रफ्तार जिंदगी, चमचमाती कारें और ऊंची-ऊंची इमारतें—इन सबके बीच 'ओरियन कॉर्पोरेशन' की इस हफ्ते की शाम खास थी। यह कंपनी देश की सबसे बड़ी मीडिया और टेक फर्मों में से एक थी। इस भव्य पार्टी में देश के तमाम बड़े उद्योगपति, राजनेता और मशहूर हस्तियां मौजूद थीं।इस चमक-धमक से दूर, हॉल के एक कोने में खड़ी आरोही अपनी डायरी में कुछ लिख रही थी। आरोही इस कंपनी में एक सीनियर इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट थी। उसकी आँखें तेज और इरादे फौलादी थे। वह यहाँ किसी पार्टी को एन्जॉय करने नहीं, बल्कि एक खतरनाक सच की तलाश में आई ...और पढ़े
The Secret Millionaire - 2
उस गुप्त कमरे के भीतर सन्नाटा पसरा हुआ था। बाहर कॉरिडोर में किसी के कदमों की आहट धीरे-धीरे दूर रही थी। कमरे में रोशनी का एकमात्र जरिया दरवाजे के नीचे से आ रही हल्की सी रोशनी थी। आरोही की सांसें अभी भी तेज थीं। उसकी पीठ दीवार से लगी हुई थी और कबीर ठीक उसके सामने खड़े थे। उनके बीच की दूरी इतनी कम थी कि आरोही को कबीर की सांसों की गर्माहट महसूस हो रही थी।"अब सांस लो, आरोही। खतरे की घंटी फिलहाल टल चुकी है," कबीर की आवाज बेहद धीमी और मखमली थी, जिसने कमरे के तनाव ...और पढ़े
The Secret Millionaire - 3
"मेरे साथ चलो!" कबीर के इन शब्दों में एक हुक्म भी था और एक गहरी सुरक्षा की भावना भी।इससे कि आरोही कुछ समझ पाती, कबीर ने उसे अपनी बांहों के सहारे तेजी से उस गुप्त कमरे के पिछले दरवाजे की तरफ खींचा। वह दरवाजा किसी पुरानी हाइड्रोलिक लिफ्ट की तरह खुलता था, जो सीधे बेसिन पार्किंग एरिया में जाती थी। हवा में एक अजीब सा तनाव तैर रहा था। बाहर बारिश की बूंदें तेज हो चुकी थीं और गाड़ियों की हेडलाइट्स की रोशनी दीवारों पर अजीब सी परछाइयां बना रही थीं।जैसे ही वे दोनों बेसमेंट में उतरे, कबीर की ...और पढ़े
The Secret Millionaire - 4
कार के भीतर पसरा सन्नाटा बाहर हो रही मूसलाधार बारिश की आवाज़ से और भी गहरा लग रहा था। की उंगलियाँ अभी भी आरोही के कंधे पर टिकी थीं। उनके स्पर्श की गर्माहट और आँखों की गहराई ने आरोही के भीतर एक अजीब सी उथल-पुथल मचा दी थी। उसने हमेशा खुद को एक निडर, तार्किक और सख्त जर्नलिस्ट के रूप में देखा था, जो भावनाओं के बहकावे में कभी नहीं आ सकती थी। लेकिन कबीर सिंघानिया के सामने उसकी सारी दीवारें कमजोर पड़ रही थीं।आरोही ने अपनी पलकें झुकाईं, खुद को थोड़ा संभाला और कबीर का हाथ अपने कंधे ...और पढ़े