कुँवारी बिंदी.

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शाम का समय था। आसमान में सिंदूरी और सुनहरी रंगत बिखरी हुई थी। गीता हमेशा की तरह अपने घर के आंगन में बैठी तुलसी के पौधे के पास दीया जला रही थी। उसी पल, अचानक वातावरण में एक अजीब सी शांति छा गई, जैसे हवाओं ने बहना रोक दिया हो। आसमान से दूधिया रोशनी की एक किरण सीधे गीता के आंगन में उतरी। जब रोशनी कुछ कम हुई, तो गीता की आँखें फटी की फटी रह गईं। उसके सामने साक्षात एक अलौकिक परी खड़ी थी। वह परी कोई और नहीं, बल्कि आकाशलोक से आई गीता की वही सहेली थी, जिसके साथ उसका पुराना और गहरा नाता था।

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कुँवारी बिंदी - 1

- लेखक: प्रेम शंकर️ लेखक का परिचय (Author Bio)प्रेम शंकर हिंदी साहित्य जगत में एक उभरते हुए और भावुक हैं। अपनी अनूठी सोच, जादुई कल्पनाशीलता और मानवीय संवेदनाओं को शब्दों में पिरोने की कला के कारण उनकी लेखन शैली पाठकों को सीधे अपनी ओर आकर्षित करती है। 'कुंवारी बिंदी' उनका एक बेहद महत्वाकांक्षी उपन्यास है, जिसमें उन्होंने प्यार की पराकाष्ठा और विरह के दर्द को बहुत ही खूबसूरती से दर्शाया है।अनुक्रमणिका (Index)1. अध्याय 1: धरती पर आगमन और खुशबू परी का बचपन2. अध्याय 2: मेले में खो जाना और परिवार का प्यार3. अध्याय 3: बचपन की ...और पढ़े

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