बनारस की सुबह हो और चौराहे पर चाय-पान की दुकान पर पंचायत न हो, ऐसा तो बनारस के इतिहास में कभी हुआ ही नहीं है। सुबह की ताजी ठंडी हवा के बीच जब घाटों पर घंटियाँ बजती हैं, तो पूरा शहर भक्ति और मस्ती के रंग में डूब जाता है। लेकिन जैसे-जैसे सूरज चढ़ता है, बनारस की सड़कों की असल रंगत और यहाँ के चिरकुट टाइप पात्रों की हरकतें शुरू होती हैं। दोपहर के ठीक दो बज रहे थे। चिलचिलाती धूप में गर्मी अपने चरम पर थी, मानो आसमान से आग बरस रही हो। अस्सी घाट की तरफ जाने वाले मुख्य चौराहे पर गाड़ियों का भोंपू लगातार क

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पिंकू की परी - 1

बनारस की सुबह हो और चौराहे पर चाय-पान की दुकान पर पंचायत न हो, ऐसा तो बनारस के इतिहास कभी हुआ ही नहीं है। सुबह की ताजी ठंडी हवा के बीच जब घाटों पर घंटियाँ बजती हैं, तो पूरा शहर भक्ति और मस्ती के रंग में डूब जाता है। लेकिन जैसे-जैसे सूरज चढ़ता है, बनारस की सड़कों की असल रंगत और यहाँ के चिरकुट टाइप पात्रों की हरकतें शुरू होती हैं। दोपहर के ठीक दो बज रहे थे। चिलचिलाती धूप में गर्मी अपने चरम पर थी, मानो आसमान से आग बरस रही हो। अस्सी घाट की तरफ जाने वाले ...और पढ़े

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पिंकू की परी - 2

तरबूज के बीज और बनारसी थप्पड़'सर्रर्र... भूंऊऊऊ...' की अजीब सी आवाजें पिंकू पांडे के कानों में लगातार गूँज रही पीठ के नीचे की हड्डी में थोड़ी ठंडक का अहसास हुआ, तो पिंकू ने झटके से अपनी आँखें खोल दीं।कमरे की वो जानी-पहचानी फटी हुई चटाई और सीलन भरी दीवारें गायब थीं। पिंकू इस समय स्टील की एक चमचमाती हुई ठंडी टेबल पर लेटे हुए थे। चारों तरफ अजीबोगरीब मशीनें लगी थीं, जिनमें नीली, हरी और लाल बत्तियां भुक-भुक जल रही थीं। छत पर लोहे के बड़े-बड़े पाइप थे, जिनसे हल्का सा धुआँ निकल रहा था।पिंकू ने घबराकर अपने कुर्ते ...और पढ़े

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पिंकू की परी - 3

अम्मा की तोरई और स्पेसशिप का गियर'सूं-सूं... खटर-पटर...'पिंकू पांडे उस पतले, अंधेरे लोहे के पाइप के अंदर अपने घुटनों कोहनियों के बल रेंग रहे थे। कंधे का गमछा अब उनके मुँह पर बंधा हुआ था ताकि धूल मुँह में न जाए। बनारस की तंग गलियों में छुपकर भागने का अनुभव आज अंतरिक्ष में पिंकू के बहुत काम आ रहा था। पिंकू पांडे बस सरपट आगे की ओर बढ़ते जा रहे थे। पाइप में घुप्प अंधेरा था पिंकू पांडे की हालत पतली हो गई थी पर हिम्मत करके बाबा भोलेनाथ का नाम लेते हुए धीरे धीरे आगे बढ़ने लगे।पिंकू पांडे:(मन ...और पढ़े

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पिंकू की परी - 4

वह गुप्त केबिन नीली और सुनहरी लाइटों की चकाचौंध से जगमगा रहा था। स्पेसशिप के भीतर हवा में तैरते डेटा पार्टिकल्स और होलोग्राफिक स्क्रीन किसी साइंस-फिक्शन फिल्म का सेट लग रहे थे, लेकिन वहाँ जो ड्रामा चल रहा था, वह हॉलीवुड और बॉलीवुड दोनों के बस का नहीं था।सामने खड़ी सिल्वर स्पेस सूट वाली अंतरिक्ष की अप्सरा ने अपनी जादुई, गूंजती हुई और मशीनी रूप से सुरीली आवाज़ में जब पूछा—माइ कोड नेम P444... एंड यू?तो हमारे अपने प्यारे पिंकू पांडे की बत्ती एकदम गुल हो गई। मुँह का पान (जो बनारसी मग्ही पान था और जिसके बिना पिंकू ...और पढ़े

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पिंकू की परी - 5

स्पेसशिप का इंजन अब एक अजीब सी भारी आवाज़ के साथ धड़क रहा था। फर्श पर घुटनों के बल परी (P444) अपनी नीली आँखों से चमकीले आँसू बहा रही थी, लेकिन उसके ठीक बगल में खड़ा पिंकू पांडे इस समय किसी बनारसी शेर की तरह फुफकार रहा था। सिर पर कसा हुआ लाल छीट का गमछा और आँखों में तैरता देसी गुस्सा—पिंकू ने ठान लिया था कि उस सींग वाले विलेन 'पाजी' की लंका लगानी ही है।पिंकू ने झुककर परी का हाथ पकड़ा और उसे सहारा देकर खड़ा किया। परी ने अपनी कांपती हुई उंगलियों से कंट्रोल पैनल की ...और पढ़े

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पिंकू की परी - 6

कंट्रोल रूम में चारों तरफ काला गाढ़ा धुआं भरा हुआ था और खतरे का लाल सायरन पागलों की तरह रहा था—'टी... टी... टी...'। स्पेसशिप का दाहिना पंख पाजी की मिसाइल से पूरी तरह तबाह हो चुका था। यान किसी कटी हुई पतंग की तरह डगमगाता हुआ सीधे विलेन पाजी के मुख्य अड्डे, यानी 'द डार्क सेक्टर' के बाहरी स्टील के प्लेटफार्म पर जाकर गिरा—'धड़ाम... घिससस...!' लोहे से लोहा टकराने की इतनी भयानक आवाज़ हुई कि पिंकू पांडे के कान के पर्दे सुन्न हो गए।पिंकू पांडे लुढ़कते हुए सीधे मुख्य स्टील के दरवाजे के पास जा गिरे थे। उनका सिर ...और पढ़े

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