मध्यमवर्गीय परिवार की 22 वर्षीय माया की हंसती-खेलती जिंदगी अचानक एक भयानक तूफान में घिर गई। उसके पिता की तबीयत अचानक बिगड़ी और अस्पताल के आईसीयू में उन्हें वेंटिलेटर पर डालना पड़ा। डॉक्टर का साफ़ और कड़ा निर्देश था—"अगले 48 घंटों के भीतर 50 लाख रुपये का इंतज़ाम करना होगा, वरना हम आपके पिता को बचा नहीं पाएंगे।"माया ने मदद के लिए रिश्तेदारों, दोस्तों और परिचितों के हर संभव दरवाज़े को खटखटाया। हर जगह से उसे सिर्फ़ दिलासा, बहाने और नाकामी ही मिली।

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वर्जिनिटी - भाग 1

मध्यमवर्गीय परिवार की 22 वर्षीय माया की हंसती-खेलती जिंदगी अचानक एक भयानक तूफान में घिर गई। उसके पिता की अचानक बिगड़ी और अस्पताल के आईसीयू में उन्हें वेंटिलेटर पर डालना पड़ा। डॉक्टर का साफ़ और कड़ा निर्देश था— अगले 48 घंटों के भीतर 50 लाख रुपये का इंतज़ाम करना होगा, वरना हम आपके पिता को बचा नहीं पाएंगे। माया ने मदद के लिए रिश्तेदारों, दोस्तों और परिचितों के हर संभव दरवाज़े को खटखटाया। हर जगह से उसे सिर्फ़ दिलासा, बहाने और नाकामी ही मिली। जब घड़ी की सुइयां टिक-टिक करके उसके पिता की ज़िंदगी ...और पढ़े

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