ऋणानुबंध - अंत एक नई शुरुआत

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यह कहानी पूरी तरह से मेरी अपनी कल्पना पर आधारित है। कई बार ऐसी घटनाएं हमारे समाज में घटती रहती हैं, यह उसका एक अक्स मात्र हो सकता है। मेरी दो हिट उपन्यासों 'द मिस्ट्री ऑफ स्केलेटन लेक' और 'कलयुग के योद्धा' के बाद, अपना तीसरा उपन्यास 'ऋणानुबंध' आपके सामने प्रस्तुत करते हुए मुझे बेहद खुशी हो रही है। इस कहानी के नाम से ही आप समझ सकते हैं कि इसमें किसी का ऋण (कर्ज) चुकाने की बात होगी, लेकिन आप नायक और नायिका की जगह खुद को रखकर सोचिएगा कि अगर आप इस जगह होते, तो क्या यह 'ऋणानुबंध' चुका पाते? बस एक बात का अफसोस है, मेरे स्वर्गीय पिता जी यह कहानी नहीं पढ़ पाएंगे। मैं अपना यह उपन्यास अपने स्वर्गीय पिता जी को समर्पित करता हूँ।

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ऋणानुबंध - अंत एक नई शुरुआत - 1

यह कहानी पूरी तरह से मेरी अपनी कल्पना पर आधारित है। कई बार ऐसी घटनाएं हमारे समाज में घटती हैं, यह उसका एक अक्स मात्र हो सकता है। मेरी दो हिट उपन्यासों 'द मिस्ट्री ऑफ स्केलेटन लेक' और 'कलयुग के योद्धा' के बाद, अपना तीसरा उपन्यास 'ऋणानुबंध' आपके सामने प्रस्तुत करते हुए मुझे बेहद खुशी हो रही है।इस कहानी के नाम से ही आप समझ सकते हैं कि इसमें किसी का ऋण (कर्ज) चुकाने की बात होगी, लेकिन आप नायक और नायिका की जगह खुद को रखकर सोचिएगा कि अगर आप इस जगह होते, तो क्या यह 'ऋणानुबंध' चुका ...और पढ़े

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