रात, जिसने शहर की नींद छीन ली रात के दो बजकर सत्रह मिनट। अर्जुनपुर शहर सो रहा था। सड़कें लगभग खाली थीं। कहीं-कहीं स्ट्रीट लाइट की पीली रोशनी बारिश से भीगी सड़क पर पड़ रही थी। आसमान में बादल इतने घने थे कि चाँद का नामोनिशान नहीं था। हवा में अजीब-सी ठंडक थी, जैसे मौसम किसी अनहोनी की खबर पहले से जानता हो।

1

लाल निशान - 1

लाल निशानभाग – 1 : मौत की शुरुआतअध्याय 1रात, जिसने शहर की नींद छीन लीरात के दो बजकर सत्रह शहर सो रहा था।सड़कें लगभग खाली थीं। कहीं-कहीं स्ट्रीट लाइट की पीली रोशनी बारिश से भीगी सड़क पर पड़ रही थी। आसमान में बादल इतने घने थे कि चाँद का नामोनिशान नहीं था। हवा में अजीब-सी ठंडक थी, जैसे मौसम किसी अनहोनी की खबर पहले से जानता हो।शहर के बाहरी इलाके में स्थित शिव विहार पार्क वर्षों से वीरान पड़ा था। दिन में भी वहाँ लोग कम ही आते थे। पार्क के पीछे घना जंगल था और सामने आधा बना ...और पढ़े

2

लाल निशान - 2

पिछले भाग में आपने पढ़ा...अर्जुनपुर शहर के वीरान शिव विहार पार्क में एक युवती रिया मल्होत्रा की रहस्यमय हत्या है। उसके शव के पास खून से बना एक अजीब प्रतीक मिलता है—आधा लाल वृत्त और उसके बीच से गुजरती एक सीधी लाल रेखा।एसीपी काव्या सिंह और फोरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. निखिल वर्मा जाँच शुरू करते हैं, लेकिन घटनास्थल से कोई स्पष्ट सुराग नहीं मिलता। तभी पुलिस मुख्यालय में खुलासा होता है कि यही लाल निशान तीन वर्ष पुराने एक बंद हो चुके हत्या के मामले में भी मिला था।कमिश्नर राजीव खन्ना एक पुरानी फाइल निकालते हैं, जिस पर सिर्फ एक ...और पढ़े

अन्य रसप्रद विकल्प