अशोक का परिवर्तन – युद्ध से करुणा तक”भारत की धरती हमेशा से वीरता, ज्ञान और त्याग की भूमि रही है। इसी भूमि पर एक ऐसा सम्राट हुआ जिसने अपने पराक्रम से पूरे भारत को एक सूत्र में बाँधा, लेकिन बाद में अपने ही कर्मों से बदलकर मानवता का संदेश पूरी दुनिया को दिया। उसका नाम था — सम्राट अशोक।यह कहानी उसी अशोक की है — एक योद्धा से एक संत बनने की यात्रा।मगध का सिंहासन और एक युवा योद्धाबहुत साल पहले मगध साम्राज्य पर मौर्य वंश का शासन था। सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य के बाद उनके वंशजों ने राज्य संभाला।
अशोक का परिवर्तन - युद्ध से करुणा तक - 1-2
अशोक का परिवर्तन – युद्ध से करुणा तक”भारत की धरती हमेशा से वीरता, ज्ञान और त्याग की भूमि रही इसी भूमि पर एक ऐसा सम्राट हुआ जिसने अपने पराक्रम से पूरे भारत को एक सूत्र में बाँधा, लेकिन बाद में अपने ही कर्मों से बदलकर मानवता का संदेश पूरी दुनिया को दिया। उसका नाम था — सम्राट अशोक।यह कहानी उसी अशोक की है — एक योद्धा से एक संत बनने की यात्रा।मगध का सिंहासन और एक युवा योद्धाबहुत साल पहले मगध साम्राज्य पर मौर्य वंश का शासन था। सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य के बाद उनके वंशजों ने राज्य संभाला। अशोक ...और पढ़े
अशोक का परिवर्तन - युद्ध से करुणा तक - 3
सम्राट अशोक का परिवर्तनभाग 3 – धम्म का संदेश और भारत से विश्व तक की यात्राकलिंग युद्ध के बाद अशोक केवल एक राजा नहीं रहे, बल्कि शांति और करुणा के दूत बन गए। उन्होंने निश्चय किया कि अब उनकी सबसे बड़ी विजय लोगों के हृदय जीतना होगी।राजधानी पाटलिपुत्र में एक विशाल सभा बुलाई गई। मंत्री, सेनापति, विद्वान और भिक्षु उपस्थित थे। अशोक ने कहा—"आज से मेरी सबसे बड़ी शक्ति तलवार नहीं, बल्कि धर्म, सत्य और करुणा होगी।"इसके बाद पूरे साम्राज्य में धम्म के संदेश अंकित करवाए गए। बड़े-बड़े पत्थरों और स्तंभों पर यह लिखा गया कि सभी धर्मों का ...और पढ़े