तुम्हारे हिस्से का मौन मेरे हिस्से में आया.... और तेरा मन मेरे मन को भाया.....यामिनी की मृत्यु के सातवें दिन घर में अब पहले की तरह सन्नाटा नहीं रहा था।लोग थे,रिश्तेदार थे,बर्तन खनक रहे थे।धीमी आवाज़ों में बातचीत हो रही थी।लेकिन तारा को लग रहा था कि घर पहले से कहीं अधिक खाली हो गया है।शायद इसलिए क्योंकि कुछ लोग घर में नहीं रहते।वे घर ही होते हैं।यामिनी ऐसी ही थीं।उनकी धीमी आवाज़,सुबह की चाय,बरामदे में रखा उनका झूला,अधूरी पढ़ी किताबें।सब कुछ जैसे अभी भी वहीं था।फिर भी कुछ नहीं था।दोपहर के समय तारा उनकी अलमारी साफ़ करने लगी।

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सफ़ेद शॉल - 1

तुम्हारे हिस्से का मौन मेरे हिस्से में आया.... और तेरा मन मेरे मन को भाया.....यामिनी की मृत्यु के सातवें घर में अब पहले की तरह सन्नाटा नहीं रहा था।लोग थे,रिश्तेदार थे,बर्तन खनक रहे थे।धीमी आवाज़ों में बातचीत हो रही थी।लेकिन तारा को लग रहा था कि घर पहले से कहीं अधिक खाली हो गया है।शायद इसलिए क्योंकि कुछ लोग घर में नहीं रहते।वे घर ही होते हैं।यामिनी ऐसी ही थीं।उनकी धीमी आवाज़,सुबह की चाय,बरामदे में रखा उनका झूला,अधूरी पढ़ी किताबें।सब कुछ जैसे अभी भी वहीं था।फिर भी कुछ नहीं था।दोपहर के समय तारा उनकी अलमारी साफ़ करने लगी।माँ ने ...और पढ़े

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सफ़ेद शॉल - 2

तारा बहुत देर तक उस लिफाफ़े को देखती रही।कमरे में केवल टेबल लैम्प की पीली रोशनी थी।घर सो चुका रात के दो बजा रही थी।और उसके हाथों में था,यामिनी का अंतिम पत्र।धीरे-धीरे उसने लिफाफ़ा खोला।भीतर केवल एक काग़ज़ नहीं था।एक पुरानी तस्वीर भी थी।तस्वीर में यामिनी थीं।उम्र लगभग पच्चीस वर्ष।और उनके कंधों पर वही सफेद शॉल थी।तारा ने तस्वीर को अलग रखा।फिर पत्र खोला।ऊपर लिखा था,मेरी प्रिय तारा,तारा की साँस अटक गई।यामिनी को पता था...कि यह पत्र वही पढ़ेगी।पत्र आगे बढ़ा,अगर तुम यह पढ़ रही हो,तो इसका अर्थ है कि मैं अब तुम्हारे प्रश्नों का उत्तर देने के लिए ...और पढ़े

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