मुंबई की शामें कभी शांत नहीं होतीं। मरीन ड्राइव पर टकराती लहरों का शोर हो या लोकल ट्रेन की वो अंतहीन जद्दोजहद, यहाँ सुकून तलाशना रेत में सुई ढूँढने जैसा है। भार्गव, जो अंधेरी के एक छोटे से फ्लैट में अपनी लैपटॉप स्क्रीन के सामने बैठा था, उसके लिए भी सुकून एक विलासिता थी। वह पेशे से एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर था, जिसकी दुनिया कोड की लाइनों और डेडलाइन के बीच सिमटी हुई थी।
मुंबई से यूपी तक: एक अनकहा सफर - भाग 1
भाग 1: नीली स्क्रीन का जादूमुंबई की शामें कभी शांत नहीं होतीं। मरीन ड्राइव पर टकराती लहरों का शोर या लोकल ट्रेन की वो अंतहीन जद्दोजहद, यहाँ सुकून तलाशना रेत में सुई ढूँढने जैसा है। भार्गव, जो अंधेरी के एक छोटे से फ्लैट में अपनी लैपटॉप स्क्रीन के सामने बैठा था, उसके लिए भी सुकून एक विलासिता थी। वह पेशे से एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर था, जिसकी दुनिया कोड की लाइनों और डेडलाइन के बीच सिमटी हुई थी।एक रात, जब थकान आँखों पर भारी थी, भार्गव ने आदतवश अपना फेसबुक फीड स्क्रॉल करना शुरू किया। तभी 'सजेस्टेड फ्रेंड्स' की लिस्ट ...और पढ़े
मुंबई से यूपी तक: एक अनकहा सफर - भाग 2
भाग 2: मीलों की दूरियाँ, शब्दों के पुलमुंबई की मॉनसून वाली बारिश शुरू हो चुकी थी। जब आसमान से की बूंदें गिरतीं, तो शहर की रफ्तार और भी पागलपन भरी हो जाती। लेकिन भार्गव के लिए यह बारिश अब वैसी नहीं थी जैसी पिछले साल थी। अब वह खिड़की के पास बैठकर बारिश को देखते हुए अक्सर यह सोचता कि क्या यूपी के उस छोटे से शहर में भी ऐसी ही बारिश हो रही होगी? क्या रूपा भी अपने घर की बालकनी में खड़ी होकर मिट्टी की सोंधी खुशबू को महसूस कर रही होगी?दो अलग दुनिया का जुड़ावभार्गव और ...और पढ़े
मुंबई से यूपी तक: एक अनकहा सफर - भाग 3
भाग 3: दिल का इकरार, खामोश लबवक्त अपनी रफ्तार से गुजर रहा था, लेकिन भार्गव के लिए समय जैसे के 'ऑनलाइन' आने और 'ऑफलाइन' जाने के बीच ठहर गया था। मुंबई की भागदौड़ भरी जिंदगी में वह शरीर से तो मौजूद रहता, पर उसका मन हमेशा उत्तर प्रदेश की उन तंग गलियों और खेतों की मेड़ों पर भटकता रहता।**अहसास की पराकाष्ठा**एक शाम भार्गव अपने ऑफिस की छत पर खड़ा था। नीचे गाड़ियों की लंबी कतारें रेंग रही थीं और हॉर्न का शोर कानों को चीर रहा था। उसने फोन निकाला और रूपा की प्रोफाइल देखी। उसने एक नई फोटो ...और पढ़े
मुंबई से यूपी तक: एक अनकहा सफर - भाग 4
भाग 4: रूपा: एक रहस्यमयी पहेलीभार्गव के लिए रूपा एक ऐसी किताब थी जिसे वह बार-बार पढ़ना चाहता था, हर बार उसे एक नया पन्ना अधूरा मिलता। अब तक भार्गव ने रूपा को सिर्फ उसकी आवाज़ और उसके मैसेजेस के ज़रिए जाना था, लेकिन उसके मन की परतों में क्या चल रहा था, यह अब भी एक रहस्य था।रूपा का संसाररूपा का शहर उत्तर प्रदेश के एक ऐसे हिस्से में था जहाँ शाम होते ही बाज़ार बंद हो जाते थे और लोग अपने घरों में सिमट जाते थे। भार्गव ने गूगल मैप्स पर कई बार उसके शहर की गलियों ...और पढ़े
मुंबई से यूपी तक: एक अनकहा सफर - भाग 5
अध्याय 5: उम्मीदों का कांचसमय बीतने के साथ भार्गव की स्थिति उस प्यासे की तरह हो गई थी, जिसे में मृगतृष्णा दिखाई दे रही हो। वह जानता था कि रूपा के संदेश और उसकी बातें सिर्फ दोस्ती के दायरे में हैं, लेकिन उसका दिल हर बात का एक 'रोमांटिक' अर्थ निकालने की कोशिश करता। मुंबई की बारिश अब उसे भिगोती नहीं थी, बल्कि अंदर तक जलाती थी।धैर्य की परीक्षाभार्गव ने अब अपनी दिनचर्या बदल ली थी। वह रात-रात भर जागकर रूपा के लिए डिजिटल आर्ट बनाता, उसकी तस्वीरों को खूबसूरती से एडिट करता और उसे भेजता। रूपा खुश होती, ...और पढ़े
मुंबई से यूपी तक: एक अनकहा सफर - भाग 6
अध्याय 6: अधूरेपन की पूर्णतारूपा का डिजिटल दुनिया से अचानक गायब हो जाना भार्गव के लिए किसी सदमे से नहीं था। शुरुआती कुछ हफ्ते तो जैसे एक धुंध की तरह गुज़रे। वह बार-बार अपना फोन चेक करता, फेसबुक पर उसकी प्रोफाइल सर्च करता, और हर बार 'No Results Found' देखकर उसका दिल बैठ जाता। मुंबई की भीड़ में वह खुद को सबसे अकेला महसूस कर रहा था।स्मृतियों का संदूकमहीने बीत गए। भार्गव ने अब उसे कॉल करना या मैसेज करना छोड़ दिया था। उसने समझ लिया था कि ज़बरदस्ती किसी की ज़िंदगी में अपनी जगह बनाना प्यार नहीं, बल्कि ...और पढ़े