मुंबई पोर्ट टर्मिनल | रात २:१३ बजेबाहरी – मुंबई पोर्ट कंटेनर यार्ड – रातमुंबई का विशाल कंटेनर यार्ड। अरब सागर से आती नम हवा, और ऊपर से टूटती बारिश। ऐसा लग रहा है मानो आसमान फट पड़ा हो। बारिश की बूंदें इतनी घनी हैं कि दस फीट की दूरी पर भी कुछ साफ नहीं दिखता। दूर कहीं बिजली चमक रही है, उसकी गड़गड़ाहट कंटेनरों के बीच गूंज रही है।लोहे के कंटेनरों पर बारिश टकराकर एक अजीब धात्विक आवाज़ पैदा कर रही है – जैसे कोई अदृश्य ढोलकिया लगातार थाप दे रहा हो। कंटेनर तीन-तीन मंजिल ऊंचे रखे गए हैं, उनके बीच संकरे रास्ते। यह जगह अपने आप में एक भूलभुलैया है।यार्ड के बिल्कुल बीच में एक सफेद फॉर्च्यूनर खड़ी है।

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निशान - 1

दृश्य १ – मुंबई पोर्ट टर्मिनल | रात २:१३ बजेबाहरी – मुंबई पोर्ट कंटेनर यार्ड – रातमुंबई का विशाल यार्ड। अरब सागर से आती नम हवा, और ऊपर से टूटती बारिश। ऐसा लग रहा है मानो आसमान फट पड़ा हो। बारिश की बूंदें इतनी घनी हैं कि दस फीट की दूरी पर भी कुछ साफ नहीं दिखता। दूर कहीं बिजली चमक रही है, उसकी गड़गड़ाहट कंटेनरों के बीच गूंज रही है।लोहे के कंटेनरों पर बारिश टकराकर एक अजीब धात्विक आवाज़ पैदा कर रही है – जैसे कोई अदृश्य ढोलकिया लगातार थाप दे रहा हो। कंटेनर तीन-तीन मंजिल ऊंचे रखे ...और पढ़े

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निशान - 2

अधिनियम ३:---दृश्य १९ – आर्यव का ठिकाना | गुरुवार रात ११ बजेअंदर – गोवंडी की झुग्गी – रातएक छोटा-सा दीवार पर मुंबई का नक्शा, उस पर लाल निशान। मेज पर हथियार रखे हैं – पिस्तौल, चाकू, गोलियां, ग्रेनेड। आर्यव मेज के सामने बैठा है, अपनी पिस्तौल साफ कर रहा है – धीरे-धीरे, ध्यान से, जैसे कोई पुजारी पूजा कर रहा हो।करीम कोने में बैठा है, उसे देख रहा है। उसके चेहरे पर डर और उत्सुकता दोनों हैं।करीम: (धीमे से)"कल रात है। चर्च में। तू अकेला जाएगा?"आर्यव: (बिना पिस्तौल से नज़र हटाए)"अकेला।"करीम: "मैं भी चलूंगा।"आर्यव: (अब करीम की ओर देखता ...और पढ़े

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