यह दुनिया बहुत बड़ी है और सबके खयालात भी अलग होते हैं, इसलिए मैंने आज कुछ अलग सोचा है, हां मानती हूं कि इस विषय में बहुत सी कहानियां और नोवेल्स होंगी मगर फिर भी एक अलग नजरिए से इस कहानी को लिखने की कोशिश करुंगी। तो चलिए शुरू करते हैं। •••••••• एक आलिशान घर जहां एक लड़की खाना बना रही थी। उसने बड़े चाव से पक रहें लजीज खाने को देखा और फिर तभी अचानक कुछ हुआ।
Back for Revenge - 1
यह दुनिया बहुत बड़ी है और सबके खयालात भी अलग होते हैं, इसलिए मैंने आज कुछ अलग सोचा है, मानती हूं कि इस विषय में बहुत सी कहानियां और नोवेल्स होंगी मगर फिर भी एक अलग नजरिए से इस कहानी को लिखने की कोशिश करुंगी। तो चलिए शुरू करते हैं।••••••••एक आलिशान घर जहां एक लड़की खाना बना रही थी। उसने बड़े चाव से पक रहें लजीज खाने को देखा और फिर तभी अचानक कुछ हुआ।"छोड़ो मुझे, कौन हो तुम? कहां ले जा रहे हों मुझे? छोड़ो।" वही लड़की जिसे अब कुछ गुंडो ने पकड़ रखा था। वह चिल्ला रही ...और पढ़े
Back for Revenge - 2
एक साल बाद,(जिन्दल इंड्रस्टीज़)"महाराज! आज वो दिन है जिस दिन उस कन्या की मृत्यु हुई थी और आज ही दिन भी हैं जब उसे जन्म लेना है।" चित्रगुप्त ने कहा।"हां तो इसमें मुझे बताने लायक क्या बात है उसके आत्मा को रिहा कर दो क्योंकि मैं मृत्यु का देवता हूं जनम देना मेरे हाथ में नहीं।" यमराज ने कहा।"महाराज जहां तक मुझे याद है, आपने इस लड़की को एक वादा किया था। और उस वादे के मुताबिक आपको ही इसे नया जीवन देना होगा।" चित्रगुप्त ने कहा ।"लेकिन संसार का सृजनकर्ता मैं नहीं हूं। मैं भला ये कार्य कैसे ...और पढ़े
Back for Revenge - 3
बेटी होने की खबर सुनकर दोनों ने हैरानी से एक दूसरे को देखा फिर दादी मां कि तरफ, और जोर से चिल्ला उठें।"मैं पापा बन गया! और भगवान का लाख लाख शुक्र है कि मुझे दुनिया का सबसे खूबसूरत रत्न दे दिया।" जिन्दल साहब ने खुश होते हुए कहा और उनके आंखों में पानी आ गया उनकी खुशी देखकर सबके आंखों में आंसू आ गये।"आखिरकार हमारी फैमिली का श्राप टूट ही गया। आज बरसों बाद इस घर में लड़की कि किलकारी गूंजी हैं।" दादी मां ने कहा।"हां मां, भगवान ने भले ही देर से हमें संतान सुख दिया लेकिन ...और पढ़े
Back for Revenge - 4
आज नित्या को जन्म लिए पूरे दस दिन हो गए थे। इन दिनों उसने यह महसूस किया था कि सबके लिए कितनी स्पेशल हैं। हालांकि वह दिन भर सोती और समय समय पर रोती रहती। उसके लिए यह कहना मुश्किल था कि अभी दिन है या फिर रात क्योंकि वह जिस कमरे में थी वहां लगभग पूरा समय लाइट जलती रहती। हां यह उसके लिए अजीब था क्योंकि वह लोगों की बातों को समझ सकती थी और लाइट उसके छोटे छोटे आंखों पर चुभती थी लेकिन उसकी आंखें इस लाइट की आदी हो चुकी थी।उसने किसी को कहते सुना ...और पढ़े