कहानी शुरू होती है दादरा गाँव से, एक ऐसा प्यारा सा गाँव, जहाँ सुबह की हवा में मिट्टी की खुशबू और शाम को सपनों की आहट होती है।दादरा... यह सिर्फ़ एक गाँव का नाम नहीं था, बल्कि एक अलग ही दुनिया थी जो अपनी धीमी और सुकून भरी रफ़्तार से चलती थी। यहाँ की सुबह अलार्म घड़ियों से नहीं, बल्कि मंदिर की घंटियों से होती थी।अभी सूरज पूरी तरह निकला भी नहीं था कि पूरब दिशा में आसमान सिंदूरी होने लगा था। खेतों में खड़ी फसलों पर ओस की बूंदें ऐसे चमक रही थीं, मानो रात ने जाते-जाते मोतियों की चादर बिछा दी हो।
पहला प्यार : अनकहा एहसास - भाग 1
भाग - 1 : वो पहली चोटकहानी शुरू होती है दादरा गाँव से, एक ऐसा प्यारा सा गाँव, जहाँ की हवा में मिट्टी की खुशबू और शाम को सपनों की आहट होती है।दादरा... यह सिर्फ़ एक गाँव का नाम नहीं था, बल्कि एक अलग ही दुनिया थी जो अपनी धीमी और सुकून भरी रफ़्तार से चलती थी। यहाँ की सुबह अलार्म घड़ियों से नहीं, बल्कि मंदिर की घंटियों से होती थी।अभी सूरज पूरी तरह निकला भी नहीं था कि पूरब दिशा में आसमान सिंदूरी होने लगा था। खेतों में खड़ी फसलों पर ओस की बूंदें ऐसे चमक रही थीं, ...और पढ़े
पहला प्यार : अनकहा एहसास - भाग 2
भाग - 2 : टूटे सपनों की आवाज़लंच ब्रेक की वो भीड़ मानो थम सी गई थी। समीक्षा अभी सीढ़ियों पर गिरी हुई थी, उसके घुटने में हल्की खरोंच आ गई थी, लेकिन उससे ज्यादा चोट उसके आत्मसम्मान को लगी थी।सृजन, जिसने उसे गिरते हुए देखा था, अपनी जेब में हाथ डाले, बिना किसी भाव के वहाँ से ऐसे गुजर गया जैसे कुछ हुआ ही न हो। उसकी आँखों में न हमदर्दी थी, न कोई पछतावा। बस एक अजीब सा सूनापन और अकड़। अरे, तुम ठीक तो हो? समीक्षा की सहेली, रिया, दौड़ते हुए आई और उसे सहारा देकर उठाया।समीक्षा ...और पढ़े