सौदे का सिन्दूर

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हॉस्पिटल में आईसीयू के बाहर की हवा भारी थी, जिसमें फिनाइल की तीखी गंध और वेंटिलेटर की 'बीप-बीप' करती डरावनी आवाज़ मिली हुई थी। सान्वी वर्मा के हाथ में पकड़ा हुआ वह बीस लाख का चेक कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि उसकी आज़ादी का मृत्यु-प्रमाणपत्र था। कांच के दरवाजे के उस पार, उसकी माँ, सुमित्रा, मौत से लड़ रही थीं। डॉक्टरों ने साफ़ कह दिया था— 'एडवांस एक्यूट हार्ट फेलियर'। उनके दिल के वाल्व बदलने की ज़रुरत थी और फेफड़ों में पानी भर जाने से हालत नाजुक थी। अगर अगले दो घंटों में सर्जरी शुरू नहीं हुई, तो सान्वी अपनी दुनिया खो देगी।

Full Novel

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सौदे का सिन्दूर - भाग 1

हॉस्पिटल में आईसीयू के बाहर की हवा भारी थी, जिसमें फिनाइल की तीखी गंध और वेंटिलेटर की 'बीप-बीप' करती आवाज़ मिली हुई थी। सान्वी वर्मा के हाथ में पकड़ा हुआ वह बीस लाख का चेक कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि उसकी आज़ादी का मृत्यु-प्रमाणपत्र था।कांच के दरवाजे के उस पार, उसकी माँ, सुमित्रा, मौत से लड़ रही थीं। डॉक्टरों ने साफ़ कह दिया था— 'एडवांस एक्यूट हार्ट फेलियर'। उनके दिल के वाल्व बदलने की ज़रुरत थी और फेफड़ों में पानी भर जाने से हालत नाजुक थी। अगर अगले दो घंटों में सर्जरी शुरू नहीं हुई, तो सान्वी ...और पढ़े

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सौदे का सिन्दूर - भाग 2

संगमरमर की ठंडकराठौर मेंशन का वह विशालकाय लोहे का द्वार किसी भूखे अजगर के जबड़ों की तरह धीरे-धीरे खुला। बारिश के बूंदो को चीरती हुई काली मर्सिडीज ने धीरे से भव्य परिसर में प्रवेश किया। वहां एक अजीब-सी 'जानलेवा खामोशी' दिख रही थी, जिसे केवल विंडस्क्रीन पर चलते वाइपरों की रगड़ और आसमान में गूंजती बादलों की गर्जना ही चुनौती दे पा रही थी।पिछली सीट के कोने में बैठी सान्वी की सांसें अटकी हुई थीं। उसकी बनारसी साड़ी का भीगा हुआ पल्लू उसके शरीर में एक अजीब सीहरन पैदा कर रहा था। यह ठंड बाहर के वातावरण का नहीं, ...और पढ़े

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सौदे का सिन्दूर - भाग 3

भाग-3 : दादी माँ का आशीर्वाद और झूठा दिखावासूरज की पहली किरणें पर्दों से होते हुए कमरे में दाखिल और सीधे सान्वी की आंखों पर पड़ीं। सान्वी जल्दी से उठ कर बैठ गई। कुछ समय के लिए उसे समझ ही नहीं आया कि वह कहाँ है। यह उसका छोटा सा, नमी वाला कमरा नहीं है, और न ही बाहर से दूध वाले की साइकिल की घंटी की आवाज़ नहीं आ रही थी। तभी उसकी नजर बिस्तर की दूसरी तरफ गई तभी वह अपने होश में आई और उसे कल रात की बातें याद आई की यह उसके सामने 'तकियों ...और पढ़े

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सौदे का सिन्दूर - भाग 4

शक्कर और आंसूराठौर मेंशन का किचन (रसोई) सान्वी के माता-पिता के घर से भी बड़ा था। रसोई के चारों चमकती हुई स्टील की मशीनें, बड़े-बड़े ओवन और एक ऐसा फ्रिज जिसमें शायद एक महीने का राशन आ सकता था। सान्वी चौखट पर खड़ी थी, और उसे अंदर पैर रखने में भी झिझक हो रही थी। यह घर की रसोई कम और किसी फाइव स्टार होटल ज्यादा लग रहा था।किचन के हेड कुक, जिन्हें सब 'महाराज जी' कहते थे, ने सान्वी को देखकर सम्मान से सिर झुकाया।"नमस्ते बहू रानी। दादी माँ ने बताया कि आज आपकी रसोई की रस्म है। ...और पढ़े

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सौदे का सिन्दूर - भाग 5

राठौर मेंशन के गेट से बाहर निकलते ही, आर्यन ने गाड़ी की खिड़की का शीशा थोड़ा नीचे कर लिया। की हवा में बारिश के बाद वाली नमी थी, लेकिन गाड़ी के अंदर एयर कंडीशनर की ठंडक और परफ्यूम की महक ने उसे अजीब सी घुटन में जकड़ रखा था।ड्राइविंग सीट पर आज ड्राइवर नहीं, बल्कि खुद आर्यन राठौर बैठा था। यह बात सान्वी के लिए किसी झटके से कम नहीं थी। सान्वी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि जब वह तैयार होकर नीचे आई। तो आर्यन कार में बैठा मिलेगा। तभी आर्यन ने बोला कि "दादी ने ...और पढ़े

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सौदे का सिन्दूर - भाग 6

सौदे की ढाल, स्वाभिमान की तलवारहृदय का वह पेचीदा सचतभी डॉक्टर राउंड पर आए और कमरे का भारीपन भांपते माहौल को थोड़ा हल्का किया।"सुमित्रा जी, आप वाकई खुशकिस्मत हैं। सही वक्त पर सही इलाज मिल गया, वरना देरी जानलेवा हो सकती थी।"फिर डॉक्टर आर्यन की तरफ मुड़े, "मिस्टर राठौर, अगर आपके पास वक्त हो तो मैं आपको सर्जरी की बारीकियां और आगे बरती जाने वाली सावधानियां समझा देता हूँ।"आर्यन ने सहमति से सिर हिलाया। डॉक्टर ने अपनी फाइल खोलते हुए समझाना शुरू किया, "देखिये, इनके दिल का वाल्व काफी हद तक डैमेज हो चुका था। आसान शब्दों में कहें ...और पढ़े

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सौदे का सिन्दूर - भाग 7

राठौर मेंशन का वह विशाल हॉल आज किसी प्राचीन मंदिर के गर्भगृह जैसा लग रहा था। हवा में जलते कपूर की गंध, घिसे हुए चंदन और ताजे गेंदे के फूलों की भारी महक तैर रही थी, जो साँसों के साथ शरीर के अंदर तक जाकर एक अजीब सी बेचैनी पैदा कर रही थी। पंडित जी के मंत्रोच्चार की गूंज ऊंची छतों से टकराकर पूरे घर में एक पवित्र कंपन पैदा कर रही थी। लेकिन इस पवित्रता के बीच एक अजीब सा दिखावा भी था। दीवारों और खंभों को विदेशी ऑर्किड और गुलाबों से ऐसे लाद दिया गया था जैसे ...और पढ़े

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सौदे का सिन्दूर - भाग 8

अग्नि-परीक्षा और स्वाभिमानकुल-देवता की अग्नि और एक और परीक्षाहवन शुरू हुआ। "स्वाहा" की गूंज के साथ अग्नि प्रज्वलित हो गर्मी बढ़ रही थी, और सान्वी भारी साड़ी और गहनों के बोझ से पसीने-पसीने हो रही थी। धुएं की वजह से उसकी आँखें जलने लगी थीं और गला सूखने लगा था, लेकिन वह टस से मस नहीं हुई।पंडित जी ने कहा, "अब वधू को 'पूर्णाहुति' के लिए खड़ा होना होगा। यह रस्म बहुत महत्वपूर्ण है। इसमें वधू को भारी थाल लेकर अग्नि की सात परिक्रमा करनी होगी, बिना रुके और बिना हाथ डगमगाए। अगर थाल से एक भी फूल या ...और पढ़े

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सौदे का सिन्दूर - भाग 9

रात भर से चल रहे एयर कंडीशनर की ठंडी हवा ने कमरे को किसी बर्फ के बक्से में बदल था। भारी और मोटे पर्दों से छनकर आती सुबह की एक हल्की सी किरण सीधा सान्वी के चेहरे पर पड़ी। उसकी पलकें जो कल की थकान और दिमागी उलझनों के कारण भारी हो गई थीं, अब धीरे-धीरे खुलने लगीं।कमरे में एक अजीब सा सन्नाटा था, जिसे सिर्फ दीवार घड़ी की 'टिक-टिक' ही तोड़ रही थी। सान्वी ने करवट ली। बिस्तर के बीचों-बीच खड़े किए गए उन दो बड़े तकियों की 'दीवार' अपनी जगह पर वैसी ही कायम थी, लेकिन उस ...और पढ़े

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