सुनीति ऑफिस से वापस आती है। उसके चेहरे पर थकान और उदासी साफ झलक रही है। आज ऑफिस में बॉस ने उसे डाँट दिया था। पहली बार उसे अपने आप पर भरोसा टूटा हुआ लगा। कमरे में आते ही वो ज़मीन पर बैठ जाती है और बच्चों की तरह रोने लगती है। सुनीति (रोते हुए) बोली - “मैं इतनी कोशिश करती हूँ… फिर भी सब मुझसे नाराज़ क्यों रहते हैं? क्या मैं सच में इतनी कमज़ोर हूँ?” अचानक उसके सामने टेबल पर एक सफेद रूमाल रखा हुआ दिखता है, जो कुछ देर पहले वहाँ नहीं था। सुनेति (चौंककर, धीरे से) बोली - “ये… ये रूमाल कहाँ से आया?”
अदृश्य पीया - 1
दिल्ली की बड़ी सड़कों और भीड़-भाड़ के बीच, छोटे-छोटे सपनों को लेकर आई थी सुनीति ठाकुर। AI इंजीनियर बनने सपना पूरा हो चुका था। जॉब मिल गई थी, और अब उसे बस अपने पैरों पर खड़ा होना था।सुनीति कमरे में सामान रखते हुए।सुनीति (सोचते हुए) -“ये रूम अच्छा है… छोटा है पर आराम से रह सकती हूँ। अब मेरी असली ज़िन्दगी की शुरुआत होगी।”तीन दिन तक सब सामान्य रहा।रात का समय – सुनीति लैपटॉप पर काम कर रही है)हवा हल्के से परदे हिलाती है।सुनीति (धीरे से) बोली -“ये खिड़की तो मैंने बंद की थी… हवा अंदर कैसे?”वो खिड़की चेक ...और पढ़े
अदृश्य पीया - 2
दिल्ली की बड़ी सड़कों और भीड़-भाड़ के बीच, छोटे-छोटे सपनों को लेकर आई थी सुनीति ठाकुर। AI इंजीनियर बनने सपना पूरा हो चुका था। जॉब मिल गई थी, और अब उसे बस अपने पैरों पर खड़ा होना था।सुनीति कमरे में सामान रखते हुए।सुनीति (सोचते हुए) -“ये रूम अच्छा है… छोटा है पर आराम से रह सकती हूँ। अब मेरी असली ज़िन्दगी की शुरुआत होगी।”तीन दिन तक सब सामान्य रहा।रात का समय – सुनीति लैपटॉप पर काम कर रही है)हवा हल्के से परदे हिलाती है।सुनीति (धीरे से) बोली -“ये खिड़की तो मैंने बंद की थी… हवा अंदर कैसे?”वो खिड़की चेक ...और पढ़े
अदृश्य पीया - 3
सुनीति ऑफिस से वापस आती है। उसके चेहरे पर थकान और उदासी साफ झलक रही है।आज ऑफिस में बॉस उसे डाँट दिया था। पहली बार उसे अपने आप पर भरोसा टूटा हुआ लगा।कमरे में आते ही वो ज़मीन पर बैठ जाती है और बच्चों की तरह रोने लगती है।सुनीति (रोते हुए) बोली -“मैं इतनी कोशिश करती हूँ… फिर भी सब मुझसे नाराज़ क्यों रहते हैं? क्या मैं सच में इतनी कमज़ोर हूँ?”अचानक उसके सामने टेबल पर एक सफेद रूमाल रखा हुआ दिखता है, जो कुछ देर पहले वहाँ नहीं था।सुनेति (चौंककर, धीरे से) बोली -“ये… ये रूमाल कहाँ से ...और पढ़े
अदृश्य पीया - 4
सुनीति अलमारी से कौशिक का बैग निकालती है। उसमें से तस्वीरें, मार्कशीट और डायरी टेबल पर रख देती है। ध्यान से सब देखता है।सुनीति (गंभीर होकर) बोली -ये देखो तरुण… ये सब कौशिक का है।इतना होनहार, इतना अच्छा इंसान… अचानक कैसे ग़ायब हो गया?ये राज़ मुझे जानना है।तरुण (सोचते हुए) बोला -सुनीति, मेरी मानो तो तुम ये कमरा छोड़ दो।यहाँ रहना तुम्हारे लिए खतरनाक हो सकता है।नया फ्लैट ले लो, शांति से रहो।”तरुण अभी बोल ही रहा होता है कि अचानक उसकी पीठ पर ज़ोरदार तमाचा पड़ता है। वो चिल्लाकर उछल पड़ता है।तरुण (चीखकर) बोला -आह्ह! किसने… किसने मारा?कमरे ...और पढ़े
अदृश्य पीया - 5
सुनीति अपने घर में टहल रही है। बेचैन नज़रें, कांपते हाथ। अचानक दरवाज़े पर घंटी बजती है।सुनीति (दरवाज़ा खोलते बोली -तरुण… अंदर आओ।तरुण अंदर आता है। सुनीति उसे बैठने का इशारा करती है।सुनीति (गंभीर आवाज़ में) बोली -तरुण… अब मैं तुमसे वो बात कहने जा रही हूँ, जो शायद कोई विश्वास नहीं करेगा।ये कमरा… ये जगह… ये सिर्फ़ मेरी नहीं है। यहाँ कोई और भी है… कौशिक ठाकुर।तरुण थोड़ी देर चुप रहता है, फिर हंसकर कहता है।तरुण बोला -मतलब वही लड़का जो गायब हो गया था?सुनीति (तेज़ी से सिर हिलाकर) बोली -हाँ… वो यहीं है। अदृश्य। मैंने उसे महसूस ...और पढ़े
अदृश्य पीया - 6
टीम धीरे-धीरे टूटी दीवार के रास्ते लैब के अंदर घुसती है। अँधेरा है, लेकिन मशीनों की धीमी-धीमी आवाज़ गूँज है। चारों तरफ़ तार, केमिकल के बड़े-बड़े कंटेनर और लाल-नीली लाइट्स।राकेश (फुसफुसाकर) बोला -“यही है वो जगह… जहाँ खतरनाक प्रयोग होते हैं।”(अचानक दीवार पर लगी स्क्रीन अपने आप जल उठती है। उस पर अजीब कोड्स और फॉर्मूलों की झलक आती है। सुनेति ठिठक जाती है।)सुनीति बोली -“ये वही फॉर्मूला है… जो डायरी में लिखा था।”(गुंजन कंप्यूटर हैक करने लगती है। तभी काँच के बड़े चैंबर में हल्की रोशनी होती है। सब चौंककर देखते हैं। चैंबर के अंदर कुछ इंसानी सिलुएट्स ...और पढ़े
अदृश्य पीया - 7
(रात के 2:34 बजे। कमरे में हल्की पीली रोशनी।(सुनीति चश्मा लगाए खड़ी है। कौशिक उसके सामने बैठा है — बार पूरी तरह साफ़ दिखाई देता हुआ।)(दोनों चुप हैं।)कभी-कभी जब कोई सपना सच होता है…तो इंसान डरता है कि कहीं आँख झपकते ही टूट न जाए।सुनीति (धीरे से) बोली -“तुम… ऐसे सामने बैठकरमुझसे बात करोगे…मैंने कभी सोचा भी नहीं था।”कौशिक (मुस्कुराकर)। बोला -“मैं भी नहीं।मैं तो भूल ही चुका था किकोई मुझे इस तरह देख पाएगा।”(सुनीति उसे ध्यान से देखती है।)सुनीति बोली -“तुम थके हुए लगते हो।”कौशिक (सच्चाई से) बोला -“क्योंकि दो साल से…मैं बस मौजूद था,पर ज़िंदा नहीं।”(सुनीति पानी ...और पढ़े
अदृश्य पीया - 8
(सुबह की धूप कमरे में आ रही है।)(कौशिक आईने के सामने खड़ा है — पूरी तरह साफ़ दिख रहा (मुस्कुराकर) बोला -“मैं सच में ठीक हूँ, सुनीति।”(सुनीति राहत की साँस लेती है।)सुनीति बोली -“आज पहली बार डर नहीं लग रहा।”(वो दोनों साथ नाश्ता करते हैं — बिल्कुल आम कपल की तरह।)(ड्रॉइंग रूम – पूरा परिवार मौजूद है।)राकेश बोला -“अब कोई परछाईं नहीं, कोई अदृश्यपन नहीं।सब कुछ नॉर्मल है।”राधिका (हँसते हुए) बोली -“लगता है किस्मत ने आखिरकार चैन दे दिया।”(कौशिक सबको देखकर सिर झुकाता है — कृतज्ञता में।)(ऑफिस – कौशिक लैपटॉप पर काम कर रहा है।)कौशिक फिर से ज़िंदगी की ...और पढ़े