अमर – प्रेम – राज अध्याय 1 : अंधेरी रात, एक माँ और अधूरा सच बरसात की वह रात जैसे पूरे शहर पर बोझ बनकर उतरी थी। आसमान में बादल नहीं, बल्कि काले इरादे तैर रहे थे। कभी तेज़ बिजली चमकती, कभी डरावनी खामोशी फैल जाती। शहर के पुराने हिस्से में एक बदनाम इलाका था — काला चौक। यह इलाका दिन में भी उजाड़ लगता था, रात में तो जैसे मौत का बसेरा बन जाता। उसी गली में एक औरत तेज़ कदमों से चल रही थी। उसकी साड़ी भीगी हुई थी, बाल चेहरे से चिपके हुए थे। गोद में एक नवजात बच्चा — रो नहीं रहा था, बस साँस ले रहा था… जैसे हालात को समझ रहा हो।
ट्रिपलेट्स भाग 1
ट्रिपलेट्स भाग 1अमर – प्रेम – राजअध्याय 1 : अंधेरी रात, एक माँ और अधूरा सचबरसात की वह रात पूरे शहर पर बोझ बनकर उतरी थी।आसमान में बादल नहीं, बल्कि काले इरादे तैर रहे थे।कभी तेज़ बिजली चमकती, कभी डरावनी खामोशी फैल जाती।शहर के पुराने हिस्से में एक बदनाम इलाका था — काला चौक।यह इलाका दिन में भी उजाड़ लगता था, रात में तो जैसे मौत का बसेरा बन जाता।उसी गली में एक औरत तेज़ कदमों से चल रही थी।उसकी साड़ी भीगी हुई थी, बाल चेहरे से चिपके हुए थे।गोद में एक नवजात बच्चा — रो नहीं रहा था, ...और पढ़े
ट्रिपलेट्स भाग 2
ट्रिपलेट्स भाग 2लेखक राज फुलवरेअध्याय 3 : शहर पर एक ही चेहरे का आतंकभाग 1 : शहर की नींद हैरात के ठीक दो बजे थे।शहर के सबसे व्यस्त इलाके लक्ष्मी मार्केट में अचानक अफरा-तफरी मच गई।एक ज्वेलरी शॉप के बाहर भीड़ जमा थी।काँच टूटा हुआ था, अलार्म बज रहा था और अंदर एक आदमी लहूलुहान हालत में पड़ा था।दुकान का मालिक रोते हुए चिल्ला रहा था—“वो… वो आदमी… बिल्कुल उसी जैसा था… रोज़ जो ऑफिस जाता है…”भीड़ में किसी ने कहा—“अमर… या प्रेम?”शब्द हवा में तैर गया।भाग 2 : पुलिस की उलझनइंस्पेक्टर शेखर राठौड़ घटनास्थल पर पहुँचे।उन्होंने खून से ...और पढ़े
ट्रिपलेट्स भाग 3
ट्रिपलेट्स भाग 3लेखक राज फुलवरेअध्याय 6 : जब आईने आमने-सामने आएभाग 1 : सुनसान फैक्ट्री — टकराव की जगहशहर बाहरी इलाके में एक पुरानी बंद फैक्ट्री थी।टूटी हुई खिड़कियाँ, जंग लगे गेट, और हर तरफ़ सन्नाटा।रात गहरी थी।हवा में नमी और डर मिला हुआ था।अमर और प्रेम फैक्ट्री के अंदर दाख़िल हुए।हाथों में सिर्फ़ हिम्मत थी।प्रेम ने धीमे स्वर में कहा—“यहीं बताया था रानू ने… यही जगह है।”अमर ने चारों ओर देखा।“बहुत शांति है… ज़रूरत से ज़्यादा।”अचानक—तालियों की आवाज़ गूँजी।“वाह… अपनी ही शक्ल से डर रहे हो?”आवाज़ सामने से आई।धुएँ के बीच से एक आदमी बाहर आया।कद, चेहरा, चाल—सब ...और पढ़े