इस रचना के सभी पात्र ओर घटनाएं काल्पनिक है इनका किसी धर्म ओर जाति ,मानव ,पशु से कोई लेना देना नहीं है । ये मात्र मेरे दिमाग ओर मेरी लेखनी की उपज है इस कहानी के सारे राइट्स मेरे अधीन है कोई भी इसको कॉपी पेस्ट ओर धारावाहिक,screenplay सीरीज, बेब सीरीज में बिना लेखक की मदद से नहीं कर सकता है )️या कुन्देन्दुतुषारहारधवला..." और "शुक्लां ब्रह्मविचार सार..."___________ लेखक:भगवत सिंह नरूका __जब इस धरती का सृजन हुआ तब उस दुनिया बनाने वाले ने पहले इस भरत वर्ष की भूमि को देवो के
Ashvdhaama: एक युग पुरुष - 1
इस रचना के सभी पात्र ओर घटनाएं काल्पनिक है इनका किसी धर्म ओर जाति ,मानव ,पशु से कोई लेना नहीं है । ये मात्र मेरे दिमाग ओर मेरी लेखनी की उपज है इस कहानी के सारे राइट्स मेरे अधीन है कोई भी इसको कॉपी पेस्ट ओर धारावाहिक,screenplay सीरीज, बेब सीरीज में बिना लेखक की मदद से नहीं कर सकता है )️या कुन्देन्दुतुषारहारधवला... और शुक्लां ब्रह्मविचार सार... ___________ लेखक:भगवत सिंह नरूका __जब इस धरती का सृजन हुआ तब उस दुनिया बनाने वाले ने पहले इस भरत वर्ष की भूमि को देवो के ...और पढ़े
Ashvdhaama: एक युग पुरुष - 2
अभी तक आपने पढ़ा कि ये कहानी विज्ञान ओर पौराणिक का एक मिश्रण है ,एक ऐसा युग पुरुष जिसका एक साधारण ब्राह्मण परिवार में हुआ ,दर्द दुखों के बीच ।ओर आपने पढ़ा कि श्री कृष्ण ने कैसे उस योद्धा को महाभारत युद्ध में उसके गलत परिणाम के कारण श्राफ दिया ,,।फिर आपने पढ़ा कि उस युग पुरुष की तलाश लाखों साल बाद एक कलयुग के युग में उसको वापिस लाने की कोशिश करता है ।अब आगे _______ योगेश्वर अग्निवंश का रहस्य”दिल्ली—रात के 2:17 बजे।ISAR (Indian Scientific Advanced Research) की मुख्य इमारत में,लैब-7 की रोशनी अब ...और पढ़े
Ashvdhaama: एक युग पुरुष - 3
दिल्ली के ऊपर हल्की बारिश की बूंदें गिर रही थीं।सड़कों पर पीली रोशनी फैल रही थी।लेकिन ISAR के वैज्ञानिक की एक खिड़की अभी भी चमक रही थी—वहीं खिड़की जहाँ से भारत का सबसे अनोखा वैज्ञानिकरात-दिन पुराणों और विज्ञान की टकराहट में उलझा रहता था।डॉ. योगेश्वर अग्निवंश,एक ऐसा नाम जो कई लोगों के लिए सिर्फ़ ‘पागल वैज्ञानिक’ था,लेकिन उसके नाम कई महत्वपूर्ण कार्य थे जिनकी सच्चाई को झुठलाया नहीं जा सकता था ।परंतु इतिहास के हर पन्ने में चिंगारी ढूँढ़ने वाला आदमी। अचानक से इस तरह बदल गया इसके पीछे का कारण कोई नहीं समझ सकाआज उसकी आँखों में पहले ...और पढ़े
Ashvdhaama: एक युग पुरुष - 4
. दिल्ली के ऊपर हल्की बारिश की बूंदें गिर रही थीं. सडकों पर पीली रोशनी फैल रही थी. लेकिन के वैज्ञानिक ब्लॉक की एक खिडकी अभी भी चमक रही थी—वहीं खिडकी जहाँ से भारत का सबसे अनोखा वैज्ञानिकरात- दिन पुराणों और विज्ञान की टकराहट में उलझा रहता था. डॉ. योगेश्वर अग्निवंश, एक ऐसा नाम जो कई लोगों के लिए सिर्फ ‘पागल वैज्ञानिक’ था, लेकिन उसके नाम कई महत्वपूर्ण कार्य थे जिनकी सच्चाई को झुठलाया नहीं जा सकता था. परंतु इतिहास के हर पन्ने में चिंगारी ढूँढने वाला आदमी. अचानक से इस तरह बदल गया इसके पीछे का कारण कोई ...और पढ़े
Ashvdhaama: एक युग पुरुष - 5
“पहला संकेत – जब दो युग टकराए”दिल्ली की रात शांत थी,पर ISAR के स्पेशल सर्वेलेंस रूम में तेज़ अलार्म उठा।एक लाल रोशनी टिमटिमा रही थी।डिजिटल मैप पर हिमालय का एक बिंदु लगातार चमक रहा था।“Unidentified Entity Tracking Back.”ऑपरेटर घबरा गया।“सर… जो भी वहाँ है… वह हमारे सिस्टम को स्कैन कर रहा है!”कमरे में senior officer रथौड़ घुसा—“क्या मतलब है? कोई इंसान हमारे सिस्टम को हेक कर रहा है?”ऑपरेटर बोला—“नहीं सर… यह न तो हैकिंग है, न कोई सिग्नलिंग… यह कुछ अलग ही है।जैसे कोई ऊर्जा तरंग हमें देख रही हो।”रथौड़ चिल्लाया—“ऐसी बकवास मुझे मत सुनाओ। किसी को बुलाओ जो ...और पढ़े
Ashvdhaama: एक युग पुरुष - 6
कहानी नहीं… चेतावनी हूँ मैं।मेरे पास आने की कोशिश मत करना।”अभी भी मेरा सवाल है ,,(योगेश्वर अग्निवंश ने उससे रखने को बोले दोनों के बीच महाभारत काल के संबंधिक सवाल जवाब हुए जिन में सभी सवालों के जवाब ठीक ठीक थे उससे वो बहुत खुश हुआ ओर उसको बिलीव भी हो गया उस योगेश्वर पर )फिर कुछ सेकंड बाद—“लेकिन तुम आओगे… मैं जानता हूँ।” क्योंकि मेरे सारे योगों की दवा सिर्फ तुम्हारे घर में है । जिसके तुम जन्म दाता हो आज से तुम मै हु मै ही तुम हु ।और स्क्रीन पूर्णतः black हो गई।योगेश्वर ने धीरे से ...और पढ़े
Ashvdhaama: एक युग पुरुष - 7
अभी तक आपने पढ़ाजिन में सभी सवालों के जवाब ठीक ठीक थे उससे वो बहुत खुश हुआ ओर उसको भी हो गया उस योगेश्वर परफिर कुछ सेकंड बाद—“ लेकिन तुम आओगे. मैं जानता हूँ। क्योंकि मेरे सारे योगों की दवा सिर्फ तुम्हारे घर में है. जिसके तुम जन्म दाता हो आज से तुम मै हु मै ही तुम हु. और स्क्रीन पूर्णतः black हो गई. योगेश्वर नेकहा—“ यह संवाद. इतिहास का पहला वैज्ञानिक-पौराणिक संपर्क था। उसी समय उसने समित चौहान को संपर्क किया वो कुछ ही मिनटों बाद उस लेब में पहुंच गया ओर साथ में राठौड भी, जब ...और पढ़े
Ashvdhaama: एक युग पुरुष - 8
रात ढल गई थी, पर शहर की सडकें अभी भी थोडी- थोडी रोशनी से भरी थीं. ।आदित्य घर की से नीचे उतरा और फोन को बंद कर दिया. अजीब फोन कॉल, केदारखंड” का नाम, और वो पुराना बॉक्स—सब कुछ एक क्षण को उसे अंदर तक हिला गया था. लेकिन उसके भीतर एक आवाज और थी—“ अभी नहीं.आदित्य ने खुद को समझाया,मैं पापा के रास्ते में अभी नहीं कूदूँगा. अभी नहीं. जीवन अभी कुछ और मांग रहा है।उसने बॉक्स वापस अलमारी में रख दिया.S- 91 की गुप्त बैठकदिल्ली के बाहरी इलाके की एक पुरानी सरकारी इमारत में रात के दस ...और पढ़े
Ashvdhaama: एक युग पुरुष - 9
जिसे मृत मान लिया गया. वह जीवित था”रात का समय था.हिमालय की ऊँचाइयों पर बहती ठंडी हवा में एक सी गंध घुली हुई थी—धूप, राख और किसी अनजानी शक्ति की महक. दूर कहीं तंत्र- मंत्र की धीमी- सी आवाजें गूँज रही थीं. सामने एक विशाल गुफा, जिसकी दीवारों पर लाल धागों और अज्ञात चिह्नों की लिखावट थी.अश्वत्थामा कई वर्षों से इसी स्थान पर आता- जाता था. लेकिन आज कुछ अलग था. गुफा में बैठे नागा- साधुओं के सामने एक नया व्यक्ति खडा था—लंबे बाल, झुर्रियों से भरा चेहरा, शरीर पर सफेद चादर. और आँखों में जिद, जुनून, और अनकहा ...और पढ़े
Ashvdhaama: एक युग पुरुष - 10
अग्निवंश शांत बैठा था. उसके सामने धूनी जल रही थी, पर आग की लपटें नहीं काँप रही थीं — स्वयं अग्नि भी सुनने को तैयार हो.मैं. अश्वत्थामा. सहस्राब्दियों बाद पहली बार किसी को अपनी कथा सुनाने जा रहा था.अश्वत्थामा ने गहरी साँस ली. मेरी आँखों में युगों की राख थी. योगेश्वर,मैंने कहा,तुम मुझसे मेरे युद्ध पूछते हो, मेरे शाप पूछते हो. पर कोई यह नहीं पूछता कि यह सब शुरू कैसे हुआ.उसने दृष्टि आकाश की ओर उठाई. वह आकाश,जिसे मैंने तब भी देखा था.और आज भी वही है. जब शिक्षा एक युद्ध थी जब कौरव और पांडव बालक थे, ...और पढ़े
Ashvdhaama: एक युग पुरुष - 11
हिंदुकुश पर्वत की गहरी घाटियों के बीच, बर्फ से भरा एक सूना इलाक़ा थाकुंजर पास, जहाँ आज भी कई पर कोई इंसान पैर नहीं रखता।रात का समय था।आसमान बादलों से भरा, हवा में बर्फ की ठंडक,और घाटी के सन्नाटे में सिर्फ़ एक आवाज़ गूँज रही थीखुरच-खुरच… पत्थर में कुछ खोदा जा रहा था।तीन लोग काले जैकेट पहने, सिर पर नाइट-विज़न गॉगल्स लगाए, एक प्राचीन चट्टान को सावधानी से काट रहे थे।उनका लीडर—ज़ाराक , 45 साल का, दाढ़ी में सफ़ेद लकीरें, दुनिया के कई “ब्लैक-लिस्टेड” संगठनों से जुड़ा एक रहस्यमयी नाम।उसके हाथ में एक पुरानी, लेदर-कवर डायरी थीजिस पर संस्कृत ...और पढ़े
Ashvdhaama: एक युग पुरुष - 12
वर्तमान समयअसुर वंश = आज के आधुनिक आतंकी संगठन,और उनकी उत्पत्ति जोड़ दी जाए गांधार (काबुल–कंधार क्षेत्र) से जहाँ शकुनि का राज्य था —अश्वत्थामा जिस मणि को माथे पर धारण करता था, असुर वंश उसी मणि की तलाश में हैं उधर दैत्य गुरु शुक्राचार्य का एक सेवक उनका आहवान करके अश्व धामा तक पहुंचे की कोशिश कर रहा था ।क्योंकि वहअमरता,अजेयता,ऊर्जा नियंत्रण,और समय के संतुलन को प्रभावित करने की शक्ति देती है।और आज के आतंकवादी संगठन इसी असुर वंश के मानव-रूप वंशज हैं।अब आगे ____“गांधार की परछाइयाँहिमालय की गुफा के बाहर विस्फोट की गूँज पड़ी। ओर कुछ हलचल अश्व ...और पढ़े
Ashvdhaama: एक युग पुरुष - 13
कुंजर पास की गुफ़ा से बाहर निकलने के बाद बरसती बर्फ़ और उफनती हवाएँ पूरी घाटी को निगल रही और सिरिना दोनों तेज़ी से नीचे उतर रहे थे।उनके पीछे दो और वाहन खड़े थे।Black Falcon Unit, आतंकियों की एक निजी टास्क फोर्स, जो सिर्फ़ छाया में काम करती है।ड्राइवर ने पूछा,“सर, अंदर क्या मिला?”ज़ाराक ने एक ठंडी, लंबी साँस ली“जो चाहिए था… उसका संकेत।किसी ने वहाँ किसी को नहीं मारा…वह वहाँ मौजूद था।” जो हमे उस मणि तक पहुंचा सकता है अकेले हम नहीं है उसके पीछे ओर भी कई ताकते है ,इस लिए हर कदम बड़ी चालाकी से ...और पढ़े
Ashvdhaama: एक युग पुरुष - 14
दिल्ली की एक पुरानी इमारतजिसे सरकारी रिकॉर्ड में “Archive Storage 11-C” नाम दिया गया था।पर वास्तविक नाम कम लोगों पता थाभारतीय प्राचीन युद्ध अभिलेखागार।यह जगह इतनी गुप्त थी किबड़े बड़े कई वरिष्ठ अफ़सर भी इसके बारे में नहीं जानते थे।शाम के 7 बज चुके थेमौसम में हल्की ठंड और हवा में पुरानी काग़ज़ की गंध फैली थी।अंदर एक कम रोशनी वाला कमरा,और कमरे के बीचों-बीच एक बड़ी अलमारी खुली थी।अंदर वही बैठा थाडॉ. वेदप्रकाश शुक्ल, विश्व के चुनिंदा इंडो-आर्यन मिथोलॉजी विशेषज्ञों में से एक।एक 3000 साल पुराना ग्रंथ उसके सामने खुला था।पन्ने लगभग चूर ...और पढ़े
Ashvdhaama: एक युग पुरुष - 15
दूसरी तरफ दूसरा खेल शुरू हो चुका था शुक्र को आने पर मजबूर कर दिया था ।रात — समय AMस्थान — भारत, विंध्याचल की पहाड़ियों के भीतर छिपी एक भूमिगत प्रयोगशालाधरती के नीचे 300 फीट गहराई में बनी उस प्रयोगशाला मेंना मंदिर था, ना मठ —वहाँ कोड, क्वांटम प्रोसेसर, न्यूरल नेटवर्क औरदीवारों पर उकेरे गए वैदिक मंत्र साथ-साथ साँस ले रहे थे।एक गोलाकार कक्ष जिस में बड़ी बड़ी स्क्रीन थी ।बीच में काले पत्थर की वेदी।उस पर रखा था एक क्रिस्टल कोर —जिसके भीतर घूमता हुआ नीला प्रकाश किसी जीवित आँख जैसा प्रतीत हो रहा था।“सब तैयार है सर…”एक ...और पढ़े
Ashvdhaama: एक युग पुरुष - 16
जैसा कि योगेश्वर अग्निवंश ने अश्व धामा को बोला हर रोज वो उसको अपने काल की घटी घटना सुनाएंगे,।जहाँ अग्निवंश दूसरा प्रश्न करता है और अश्वत्थामा पहली बार उस सत्य को खोलता है,।जिसे युगों से लोग अधूरा जानते हैं। वो सत्य जिस में लोग द्रोणाचार्य को गलत मानते आए है ।(अश्वत्थामा की वाणी से )योगेश्वर अग्निवंश ने मेरी ओर देखा।उसकी आँखों में संकोच नहीं था,न ही आरोपकेवल सत्य जानने की तीव्र इच्छा थी।उसने धीरे से पूछा—“हे अश्वधामा द्रोणपुत्र,क्या यह सत्य है कि आपके पिता द्रोणाचार्य ने अर्जुन को आशीर्वाद दिया था—कि तुम्हारे समान कोई दूसरा धनुर्धर नहीं होगा?”मैं मौन ...और पढ़े